Site icon Anunaad

जिंदगी इक सवाल है तुझसे…

Advertisements

बड़ी तेज बीत रही है तुझे रोकूँ कैसे
रेत सी बिखर रही मुट्ठी मैं कसूं कैसे
इस दौड़ में खुद को सम्भालूँ कैसे
एक नशे सी है तू खुद को होश में रखूं कैसे
कुछ पल बीतते नही और उम्र पल में गुजरती कैसे
जीने को इतना कुछ है पर इतनी जल्दी में जियूँ कैसे
इतनी भीड़ है कि कुछ पल अकेले में बिताऊं कैसे
तुझसे करनी है मुलाकात बता होगी कैसे
जिंदगी इक सवाल है तुझसे?

Exit mobile version