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बड़ी तेज बीत रही है तुझे रोकूँ कैसे
रेत सी बिखर रही मुट्ठी मैं कसूं कैसे
इस दौड़ में खुद को सम्भालूँ कैसे
एक नशे सी है तू खुद को होश में रखूं कैसे
कुछ पल बीतते नही और उम्र पल में गुजरती कैसे
जीने को इतना कुछ है पर इतनी जल्दी में जियूँ कैसे
इतनी भीड़ है कि कुछ पल अकेले में बिताऊं कैसे
तुझसे करनी है मुलाकात बता होगी कैसे
जिंदगी इक सवाल है तुझसे?
