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रात के आंसू…

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रात के आंसू
तो तकिए जनते हैं ।
हम रोए कितना
ये अंधेरे जानते हैं।
चेहरे के शिकन को छुपाया कैसे
ये मेरे घर के कोने जानते हैं।
तुम्हारे जाने का दुःख
झेल गए सब कुछ
मत पूछो हम ज़िंदा हैं कैसे
दिल की बातें हैं बस,
दिल की ये धड़कन जानते हैं।

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