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पीना-पिलाना!

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ये पीना पिलाना,
कभी बहुत नही होता,
ज़िंदगी ही एक नशा है,
इसमें कोई होश में नही होता।
मौत की क्या बात करनी,
वो तो आनी ही है,
कश्ती अगर धाराओं के संग
चली तो क्या नयी कहानी है।
हौसलों को ऊँचा रखो,
सिर्फ़ बातों से कुछ नही होता ,
मेरी मानो तो नशा भरपूर रखो,
होश में कुछ भी नही होता।

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