Posted in CHAUPAAL (DIL SE DIL TAK)

रिपीट मोड!

ज़िन्दगी रिपीट मोड में चल रही है…. डेली एक ही रूटीन फॉलो हो रहा है वो भी बिना किसी इंच भर के डेविएशन के ! कैसे कुछ नया होगा? कैसे लाइफ रोमांचकारी होगी? समय रहते ही कुछ नया ऐड करना होगा और कुछ पुराना डिलीट करने होगा । वरना……… जीवन तो चल ही रह है! एक दिन कट/काट ही जायेगा😜।

उम्मीद है आपकी बेहतर चल रही होगी … बिल्कुल रोमांचक! 😎 अगर नहीं तो … यही समय है परिवर्तन का🤗।

सोचिये……..!

कुछ नया ऐड करने की सलाह भी दे दीजिएगा….🙏 घनिष्ठ मित्र साथ बैठकर देंगे तो अच्छा लगेगा। हमारी बालकनी भी तैयार है😉।

©अनुनाद/चिन्तक आनन्द/२३.११.२०२०

Posted in CHAUPAAL (DIL SE DIL TAK)

बालकनी

लगभग आठ साल से रह रहा हूँ इस सरकारी घर में ! दो बालकनी हैं इस घर में। एक आगे और एक पीछे। ये पीछे वाली बालकनी है। किन्तु ये बालकनी इतनी सुंदर और सुकून की जगह हो सकती है अब जाकर पता लगा! कुछ ज़्यादा अन्तर नही है बस अब मुख्यालय से सम्बद्ध हूँ और इस बालकनी में जाने का समय मिल जाता है। वरना जब तक फ़ील्ड में था तब तक मुश्किल से आठ साल में आठ बार गया हूँगा इस बालकनी में। अब तो सुबह और शाम दोनों इसी बालकनी में बीतती हैं।

एक़ चीज़ तो साफ़ है कि ख़ुद को समय देना बेहद ज़रूरी है वरना लाख ख़ूबसूरत चीजें होंगी आपके पास किन्तु उनके साथ समय बिताने का मौक़ा न हो तो सब व्यर्थ! व्यस्त दिमाग़ कभी भी सृजनात्मक नहीं सोच सकता और न ही आनन्द ले सकता है।

मुख्यालय की तैनाती ने जीवन को फिर से खँगालने का समय दिया है। एक बार फिर से नयी शुरुआत! हर एक पल को भरपूर जीने का मौक़ा! नज़रिया बदलने का मौक़ा!

वैसे ये बालकनी तुम्हारे साथ अकेले बैठने को तैयार है 😉 बस चले आओ ! कुछ समय निकाल कर ! बहुत बातें हैं करने को ! तुमसे……तुम्हारे विषय में! शिकायतें भी हैं ! दूर तो नहीं हों पाएँगी मगर कह देंगे! दिल हल्का कर लेंगे! लड़ भी लेंगे! बस चले आओ ……

©️अनुनाद/ सम्बद्ध आनन्द/ १९.११.२०२०

Posted in CHAUPAAL (DIL SE DIL TAK)

घर गृहस्थी 🤗

घर गृहस्थी में फँसा इंजीनियर तब तक इंजीनियर नहीं होता जब तक वो कुकर का हैंडल न लगा ले या फिर पंखे का कंडेंसर न बदल ले! 😎 और हद तो तब है जब उस इंजीनियर को इन कामों को करने के बाद मिलने वाली तारीफ में इतनी खुशी मिलती है जितनी उसे किसी एग्जाम को क्लियर करके भी न मिली हो!😅

यदि आप भी खुशी के इसी स्तर पर हैं तो आप घर गृहस्थी के इस भँवर में फंस चुके हैं और आपका डूबना तय है। घबराइए मत! यहाँ डूबने पर संतोष मिलेगा जिसकी खोज में न जाने कितने साधु/महात्मा दिन रात ध्यान साधना में लगे हुए हैं और आपको इसके लिए दो पेंच ही टाइट करने हैं बस! 🙄🤗

वैधानिक चेतावनी- दोबारा पहले वाला इंजीनियर बनने की कोशिश मत करियेगा। घर पर तो कदापि नहीं😋

अपने मुँह मिट्ठू:- काम की सफाई देखकर लगता है कि खाक कोई मेकैनिक ये काम इतना फाइन और टिकाऊ कर पाता। भले ही हमने इसमें घंटो लिए हों। समय मायने नहीं रखता, परफेक्शन करता है। हुँह…… हाँ नहीं तो!

नोट:- अगर आप इंजीनियर नहीं है तो इंजीनियर शब्द के स्थान पर अपनी प्रोफाइल लगा लें। अच्छा लगेगा। लेकिन इंजीनियर होते तो ज्यादा खुशी मिलती 😁😆

©अनुनाद/ इंजीनियर आनन्द😎/१५.११.२०२०

Posted in CHAUPAAL (DIL SE DIL TAK)

टोल नाका

तुम मेरी जिंदगी के सफर में हाइवे का टोल नाका हो, जहाँ मैं पल भर को रुकता हूँ और टोल की फॉर्मेलिटी जैसे ही निपटती है, मैं फुल एक्सेलरेटर में वहाँ से निकलता हूँ और पीछे मुड़कर नहीं देखता, कभी भी! लेकिन जब तक जिंदगी का ये सफर है, ये हाइवे है, ये टोल भी रहेगा! उसी तरह तुम भी मिलते रहोगे! कभी साक्षात तो कभी ख़्यालों में, यादों की तरह ! इससे मैं बच नहीं सकता। लेकिन अगली बार एक्सेलरेटर और तेज लिया जाएगा………..!


©अनुनाद/आनन्द कनौजिया/०२.११.२०२०


फ़ोटो साभार इन्टरनेट।

Posted in CHAUPAAL (DIL SE DIL TAK)

लॉन्ग ड्राइव

लॉन्ग ड्राइव भी एक बेमिसाल चीज है। लॉन्ग ड्राइव का नाम पढ़कर कपल्स के चेहरों पर खुराफात वाली मुस्कान आ गयी होगी 😁 खैर . . . . . . ! सामान्यतः किसी का साथ हो सफर में और ये साथ आपके पसन्दीदा व्यक्ति का हो तो सफर का मजा बढ़ जाता है। लॉन्ग ड्राइव के साथ भी ये वाला नियम लागू होता है। मगर मेरे केस में ऐसा नहीं है। मुझे अकेले ही पसंद है लॉन्ग ड्राइव करना। कारण. . . . . .? बस यही जानने के लिए आज के लेख में चर्चा की जाएगी। वैसे सफर से सम्बंधित हर लॉन्ग ड्राइव, लॉन्ग ड्राइव नहीं होती। लॉन्ग ड्राइव बिना मकसद की होने वाली ड्राइव होती है, जो या तो खुद की खोज के लिए होती है या किसी दूसरे के अंदर कुछ खोजने को ! अब लोग दूसरों में क्या खोजते हैं ये आप लोग कमेंट में बताइएगा 😉

मेरे लिए लॉन्ग ड्राइव एकान्त प्रदान करने वाली व्यवस्था है जिसे मैं बाइस की उम्र से लगातार खोजता रहता हूँ। एकान्त के इस समय में हर उस चीज के बारे में सोचता हूँ जो करना चाहता था और कर नहीं पाया। न न न न न प्यार मोहब्बत पर मत जाइएगा, वो तो मैं आज भी कर रहा हूँ और करता रहूँगा 😍 अब विचार में क्या चीजें आएँगी, ये रस्ते में मिलने वाले दृश्यों पर निर्भर करती हैं। जैसे बाइक सवार कपल्स को आपस में डाटा ट्रांसफर करते हुए देखना 😝 एक पल को ३१ वर्ष का व्यक्ति भी पुनः २१ का होना चाहता है 😎 ३१ वर्ष का आदमी ये सब नही कर सकता । इसके लिए २१ वर्ष वाला खालीपन और जिम्मेदारी का अभाव होना चाहिए। ३१ का आदमी खाली हो भी जाये तो समाज और परिवार की गालियाँ खाली नहीं रहने देंगी। खैर . . . . . . .   इसी तरह मैं एक उपन्यास लिखने की प्लानिंग, हिंदी/संस्कृत में डॉक्ट्रेट करना, अपना पोएट्री कैफ़े खोलना जैसी कई ख्याल बुनता हूँ। अगर ये सब न हो पाए तो कम से कम पहाड़ों पर जाकर अंडे और मैगी का ठेला जरूर लगाना चाहूँगा। अगर मैं इंजीनियर न होता तो ऑमलेट बनाने वाला होता। आखिर में कुछ न कर पाया तो ट्रैवेल ब्लॉगर बन जाऊँगा। इसके लिए एक खादी का झोला, एक मोटा चश्मा, एक मस्त मँहगा DSLR , एक बढ़िया स्पोर्ट शूज, दो-चार इटैलियन हैंड मेड डायरी और जेब में २-४ हज़ार रुपये। बस बिना बताये घर से गायब…… कुछ सालों बाद लौटेंगे नाम कमाकर! एक फेमस ब्लॉगर बनके 😇

सपने बुनने के साथ-२ लॉन्ग ड्राइव में आपको फ़्लैश बैक में जाने को मिलता है। पीछे जाकर अपने आपको देखना और फिर खुद को चूतिया बोलने का भी अलग सुख है। ज़माने के सामने खुद को चूतिया बोलने में थोड़ी शर्म आती है। अब चूतिया भी पूरी दम से बोलते हैं और इसके साथ डी के बोस भी। इतना खो जाते हैं कि अभी पीछे वाले खुद को इतनी तेज चट्ठा मारेंगे और वो गलती करने से रोक लेंगे जिसकी वजह से आज परेशान हैं। इतने चूतिया कैसे हो सकते थे हम ! फिर क्या . . . . . ! मन मसोस कर रह जाते हैं ! क्या करें खुद से प्यार भी है तो माफ़ भी कर देते हैं खुद को। इस पूरे समय में हम चिल्ला-२ कर खुद से बात कर रहे होते हैं। कोई साधारण व्यक्ति देख ले तो आगरा छोड़ आये। खैर . . . . . इस दौरान गाड़ी ऑटो पायलट पर रहती है और हमें कुछ आभास नहीं। ईश्वर ने शरीर को गज़ब बनाया है। हमारे शरीर को दिल और दिमाग दोनों पर ही भरोसा नहीं होता। इसलिए कुछ काम वो इन दोनों को बाईपास कर खुद कर लेता है, जैसे ये ड्राइविंग !

इस बीच रास्ते में घने बादल दिखाई दे जाएँ और बारिश हो जाये तो अमोल पालेकर बनते देर नहीं लगता ! महीन सी मुस्कराहट आपके चेहरे पर और रोमांस के कीड़े कुलबुलाने लगते हैं……  कुछ पल को पहाड़ों की पिछली यात्रा याद आ जाती है ! साथ में तुम और याद आ जाते हो! इसी बीच हम “गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा . . . . . . ” वाला गाना गाने ही वाले होते हैं कि साला अगले पल ही बारिश बंद और चमकदार धूप ! अरमान जागने से पहले ही पानी फिर जाता है। लॉन्ग ड्राइव में ये दिक्कत बहुत होती है ! तब तो और ज्यादा जब आप उत्तर प्रदेश में ड्राइव कर रहे हों। 

औरतें. . . . .  सॉरी! लड़कियाँ . . . . . , हाँ ! लड़कियाँ लॉन्ग ड्राइव में क्या सोचती हैं, इसकी मुझे ज्यादा खबर नहीं ! शायद मेक अप के बारे में या फिर अगली पार्टी में क्या पहनना है! बाकी और चीजों के बारे में सोचने के लिए लड़के तो हैं ही! वो सोचेंगे ही! हैम क्यूँ सोचे! (अगर आप मेरे विचार से सहमति नहीं रखती हैं तो आप अपवाद हैं और यूनिक हैं। हमारी खूब जमेगी।) 

ख़ैर. . . . . तुम तो हमारे बारे में ही सोचती होगी 💝।

ऊपर की चर्चा के अलावा मैं एक और चीज जो सोचता हूँ वो है पैसा! ढेर सारा पैसा। इतना कि बस लुटाता जाऊँ। दोस्तों में, परिवार में, समाज में, हर किसी ऐरे-गैरे चलते-फिरते लोगों में। आदमी की इज्जत ही तब है जब वो सब पर पैसा लुटाये। सूरत और सीरत से कुछ नहीं होता। आदमी को गर्व भी होता है पैसे को अपनों या गैरों के बीच खर्च करके। एक आत्म सुख मिलता है। बिलकुल वैसा सुख जैसा तथागत बुद्ध को ज्ञान प्राप्त होने के बाद मिला होगा। शायद ! कार से चलो और चौराहे पर कोई आपसे हाथ फैलाकर माँगे और आप उसे आगे बढ़ने का इशारा कर दें, मुझे ये नहीं अच्छा लगता। गरीबों वाली फीलिंग आती है। जब तक उस गरीब को २-४ हज़ार दे न दो तब तक कोई बात? धिक्कार आदमी होने पर! इस लॉन्ग ड्राइव के दौरान हम पूरी दुनिया की गरीबी दूर कर चुके होते हैं 😜

अब पैसे कमाने के लिए कोई बिज़नेस आईडिया भी चाहिए। बदलते दौर के साथ एक नया आईडिया। ऐसा आईडिया जो आपको रातों रात अमीर नहीं बहुत अमीर बना दें। बिलकुल कठोर निर्णय, अब तो कर ही देंगे ये आईडिया इम्प्लीमेंट। लेकिन लॉन्ग ड्राइव ख़त्म होते-२ ही दिल हल्का होने लगता है की अगर फेल हो गए तो ? न न न न न न . . . . .  रिस्क है ! बहुत रिस्क है।

फिर सोचते हैं कि कोई न ! करते हैं ! देखेंगे ! फेल हो गए तो भी ऑप्शन तो है न! पहाड़ों पर अंडे और मैगी का ठेला लगाने का! तुम तो घूमने आओगे न वहाँ! मैगी खाने हमारी दुकान पर! हम अपने हाथ से बनाकर ऑमलेट भी खिलाएँगे 💖 तुम खाना  . . . . . और हम तुम्हे ताकेंगे ! बेशर्मों की तरह ! 

ख़ैर  . . . . ! प्यार में सब जायज है। ताकना भी ! ऐसा सोचना भी !

और हाँ. . . .  लॉन्ग ड्राइव में कोई टोकने वाला भी नहीं 😁

©अनुनाद /आनन्द कनौजिया /२९.१०.२०२० 

फोटू साभार इंटरनेट।