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रेडियो एक्टिव !

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तुम्हारे तन पर साड़ी
लिपटी हो जैसे नागिन,
अदाओं ने तुम्हारी ओढ़कर इसे
जहरीला और कर दिया।

साड़ी पहनना चाहते सभी पर
जन्मी है ये केवल तुम्हारे लिए,
हुनर और सलीके ने तुम्हारे आज
इस अधूरी को पूरा कर दिया।

देखो न आया करो सामने इस कलेवर में
हम अपनी जान की आज दुआ मांगते हैं,
रेडियो एक्टिव आप पहले ही क्या कम थीं
जो आज रेडिएशन का लेवल इतना अधिक कर दिया।

हम तो बस यही सोचकर परेशान हैं
दिल के मरीजों का हाल अब क्या होगा,
न्यूक्लियर हथियारों पर तो रोक-टोक है
पर आपको रोकने का इंतजाम क्या होगा।

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