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पद्मश्री योगेश प्रवीण

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तेरे बाद लखनऊ के वो किस्से कौन सुनाएगा ?
लखनऊ को लखनऊ के बारे में कौन बताएगा??

इस शहर को जानने की ख्वाहिश अधूरी रह गयी
आपसे मिलने की मेरी दिली तमन्ना अधूरी रह गयी।

शहरों को करीब से जानने की एक ललक है मुझमें… जब भी किसी गली-मुहल्ले और पुरानी इमारतों के बगल से गुजरता हूँ तो उनके होने के इतिहास में कहीं गुम हो जाता हूँ, या यूँ कहूँ की फ़्लैश बैक में ही जीता हूँ मैं!
योगेश जी के बारे में और योगेश जी को पहली बार रेडियो पर सुना था। फिर तो उनके बारे में गूगल कर डाला। खूब पढ़ा उन्हें। खुश भी हुआ कि मैं भी लखनऊ में ही रहता हूँ, एक दिन मुलाकात कर ही लूँगा ! ख़ैर….. ईश्वर को आपसे मिलने की जल्दी मुझसे कहीं ज्यादा थी और ईश्वर के आगे किसी की चलती भी कहाँ है?
अब आप ऊपर ही एक लखनऊ बसाइयेगा और वहां से धरती के लखनऊ पर अपनी कृपा दृष्टि और दुलार बनाये रखियेगा ताकि लखनऊ की विरासत सदा जिंदा रहे। अब तो आपका अधिकार क्षेत्र और नज़र और व्यापक हो गए है।

आपका जाना दुःख दायक है किंतु आप हमारे दिलों में सदा लखनऊ बनकर जीवित रहेंगें…….

सादर नमन योगेश जी 🙏

©️®️योगेश प्रवीण/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/१२.०४.२०२१

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