Site icon Anunaad

मिट्टी के घर याद आते है ….

Advertisements

बेमतलब का सबसे मिलना जुलना था,
रिश्ते वो पक्के बहुत याद आते हैं।
गर्मी की छुट्टी वो दादी-नानी का गाँव,
आम के बाग और ताल-तलैया याद आते हैं।
तपती गर्मी, भरी दुपहरिया और सखी-सहेलियाँ
सावन की ऋतु के वो झूले याद आते हैं।
छत पर सोना और वो बूढ़े पीपल की सरसराहट
खुले आसमान में वो तारे याद आते हैं।
चाचा के संग रात में खेतों को पानी देना,
भूत-पिशाचों की वो कहानियां याद आती है।
पेड़ों पर चढ़ना उतरना और ढेर सारी मस्ती,
खुद से तोड़े वो आम और जामुन याद आते हैं।
वो वर्षा ऋतु की पहली बारिश और जमकर भीगना
वो सोंधी खुशबू और मिट्टी के घर याद आते हैं।

Exit mobile version