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साथ

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जीवन की उलझनों में भी कुछ इस तरह
मैं खुद से दूर अपनों का साथ निभा लेता हूँ,
रोज़ ईश्वर के समक्ष हाथ जोड़कर हृदय से
उनके खुश रहने की दुआ माँग लेता हूँ।

मैंने अपने आप और पूरे परिवार का
कुछ इस तरह भी इंश्योरेंस करा रखा है,
अपने से जुड़े व्यक्ति के आगे बढ़ने में
बढ़-चढ़ कर अपना हाथ लगा रखा है।

एक छोटी उम्र है और जिम्मेदारियाँ कई
इस सबमें रोज़ जीनी है ज़िंदगी भी नई
इतना कुछ अकेले कहाँ सम्भव आनन्द
लेकर अनुनाद मैं जुड़ा हूँ दिलों से कई।

©️®️साथ/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/२९.०८.२०२१

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