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जादू-टोना

कौन कहता है ये जादू-टोने नहीं होते
ग़ज़ब अजूबों के अजब तजुर्बे नहीं होते
सब कुछ सीखा यहाँ हमने हंसते-रोते
और फिर देखो ये जादू नहीं तो और क्या
एक चेहरे को देखा और सब कुछ हम भूल गए……

बचपन से थे अच्छे से पढ़ते-लिखते
लोग बाग़ तारीफ़ करते नहीं थकते
सारे समीकरण ज़ुबान पर थे बने रहते
चेहरे पर उनकी ज़ुल्फ़ों से जो लिखी इबारतें
इक बार जो पढ़ी तो सारे किताबी समीकरण भूल गए…..

गुणा-गणित में हम मिनट नहीं लगाते
जोड़-घटाने में हम सबको पीछे रखते
चलता-फिरता बही-खाता सबका हिसाब रखते
होठों की हल्की मुस्कान और उनके पीछे चमकीले दाँत
और फिर उनकी चकाचौंध में हम सारी दुनियादारी भूल गए…..

बेहतरीन चीजों का हम शौक़ थे रखते
पसंद की चीजों को संजोकर थे रखते
अपनी हर चीज को दिल से लगा कर रखते
बस उनके जीवन में आ भर जाने से देखो
एक उनको अपनाकर हम सब कुछ अपना भूल गए….

कौन कहता है ये जादू-टोने नहीं होते
ग़ज़ब अजूबों के अजब तजुर्बे नहीं होते
सब कुछ सीखा यहाँ हमने हंसते-रोते
और फिर देखो ये जादू नहीं तो और क्या
एक चेहरे को देखा और सब कुछ हम भूल गए……

©️®️जादू/अनुनाद/आनन्द/२२.०६.२०२२

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रात और बात

और क्या चाहिए तुमसे करने को बात ,
दिल में तेरी याद और एक तनहा रात ।

हवा भी सरसराए तो मुझमें खिल उठते जज़्बात,
बग़ल तेरे होने के एहसास से मुकम्मल होती रात ।

इक भीड़ सी है मुझमें जो न रहने दे मुझे शान्त ,
यादों के कारवाँ संग मैं बेहद अकेला इस रात ।

ज़िन्दगी के सफ़र में तुम कहीं मैं कहीं, न होती बात,
सिर्फ़ यादों को साथ लेकर बोलो कैसे बीते रात ।

और क्या चाहिए तुमसे करने को बात ,
दिल में तेरी याद और एक तनहा रात ।

©️®️रात/अनुनाद/आनन्द/११.०६.२०२२

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ख़ूबसूरती

“ख़ूबसूरत लोग अगर अनजान हों तो अधिक ख़ूबसूरत और आकर्षक हो जाते हैं!”
😇
😍
😎

कुल मिलाकर ख़ूबसूरती एक वैचारिक fantacy के सिवा कुछ भी नहीं! यह fantacy एक व्यक्ति विशेष के जीवन भर की कल्पनाओं का समूह भर है जिसे वो किसी अनजान और ख़ूबसूरत व्यक्ति को देखकर एक पल विशेष में अनुभव कर लेता है। इन कल्पनाओं और उस देखे गए ख़ूबसूरत व्यक्ति में कोई रिश्ता नहीं होता। ये देखने वाले व्यक्ति के अंदर चल रही काल्पनिक कहानी मात्र होती है। ऐसी स्थिति में देखने वाले व्यक्ति को देखे गए व्यक्ति को लेकर कोई भी निर्णय लेने से बचना चाहिए।

ख़ूबसूरती एक मृग तृष्णा है। वास्तविकता में इसका कोई स्वरूप नहीं। सब कुछ आपके दिमाग़ के भीतर है। वहीं से आप इसे महसूस कर सकते हैं। तो अगली बार आपको ख़ूबसूरती का एहसास लेना हो तो इसे दूसरों में न ढूँढे। बस अपने दिमाग़ को इस हिसाब से अभ्यस्त करिए कि वो जब चाहे स्वयं इस ख़ूबसूरती का रसास्वादन कर ले। इस तरह आपको दूसरों से मिलने वाली निराशा से भी दो-चार नहीं होना पड़ेगा।

ऊपर वाले पैराग्राफ़ को देखकर कुछ ख़ुराफ़ाती लोग कई स्तर तक के मतलब निकाल सकते हैं🤣😆 और हास-परिहास कर सकते हैं! बस इन्हीं लोगों की वजह से मेरे लिखने की सार्थकता बढ़ जाती है 😉

यह सब लिखते वक्त मैंने बहुत सारा दिमाग़ लगाया है! ये पढ़ने में अच्छा लग सकता है मगर असल में ऐसा हो ही नहीं सकता क्यूँकि दुनिया दिल से चलती है! बिना चूतियापे के कोई कहानी बन ही नहीं सकती😋 और बिना कहानी के तो क्या ही मज़ा है जीने में 😁

इसलिए इस संसार की गति बनाए रखने के लिए मूर्खों की ज़रूरत ज़्यादा है……

मैंने भी खूब मूर्खता की है और सफ़र अभी जारी है….

खोज अभी जारी है……..

एक नयी मूर्खता करने की !

इसमें आपका साथ मिल जाएगा तो मज़ा दो गुने से चार गुने तक होने की सम्भावना है 🙃

©️®️ख़ूबसूरती/अनुनाद/आनन्द/११.०५.२०२२

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दाँव

भरोसा हमें खुद पर बहुत था
दिल कमबख़्त बहुत मज़बूत था
लगा दिया दाँव पर खुद ही को
और बहुत कुछ खोने को न था !

©️®️दाँव/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/०६.०३.२०२२

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चले जाना!

तुम जाना !
तो बस,
चले जाना…..
बिना बताए
अचानक
खामोशी से
ऐसा कि
भनक भी न मिले।

दुःख तो होगा
तुम्हारे जाने का
मगर
वो जाने के बाद होगा
और कम होगा
उस दुःख से
जब मुझे
तुम्हारे जाने का
पहले से
पता होगा!

क्यूँकि
पहले से
पता होने पर
दुःख ज़रा पहले
से शुरू होगा
और
इस तरह
दुःख की अवधि
कुछ बढ़ जाएगी।

©️®️चले जाना/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/२२.०१.२०२२