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अंधा प्यार…

हमने उन्हें चाहा बेइंतहा,
न कभी दिन देखा न रात,
वो डरते रहे दुनिया की रवायतों से 
और कर न सके दिल की बात ।
 
हम थोड़े दिमाग़ से पागल निकले,
वो दिल से कमजोर थे कैसे देते साथ,
कुछ न सोचे और कदम बढ़ा दिए हमने 
फिर क्या, उन्होंने पीछे खींच लिए हाथ ।
 
जोश ओ ज़ुनून में हमने बक दी कहानी सबको,
कुछ शुरू भी न हुआ और लोग करने लगे हमारी बात,
चला दिए तीर हमने सभी अंधेरे में, न जाने किधर गए, 
प्यार अंधा होता है, आज हमने साबित कर दी ये बात ।
 
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मर्ज-ए-इश्क़!

साँसों का तेज होना भी एक कहानी है,
और तुम समझे कि ये प्रदूषण की निशानी है।
 
गर्म और ठंडी साँसे प्यार को नापने की S.I. परिभाषा है,
और तुम नासमझ समझ बैठे कि ये बुखार बेतहाशा है।
 
इन धड़कनों के बढ़ने से न समझो कि कोई बीमारी है,
ये लाल गाल क्या बताएं उनकी उंगलियों की निशानी है।
 
कोशिशें बेहद जारी है कि उनसे कुछ बात बढ़ जाए,
इस टेंशन में भले ही इस दिल का रक्तचाप बढ़ जाए।
 
कमजोरी नही है कि जब गला सूखे और टांगे कापती है,
ये हमेशा का है जब बला सी खूबसूरत वो सामने आती हैं।
 
बेचैनी में ऐसे बड़बड़ाते हैं जैसे मनोरोगी हो गए हैं,
क्या बतायें उनसे मुलाकात को न जाने कितने दिन हो गए हैं।
 
कोई मर्ज नही फिर भी मरीजों से हो गए हैं,
वो ही मर्ज, वो ही दवा और वो ही मेडिकल स्टोर हो गए हैं।
 

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कोई जल्दी नही…

कोई जल्दी नही है

कुछ और नया हासिल करने की,

मुझे फ़ुर्सत नही है
किसी भाग दौड़ में शामिल होने की, 

ये भी क्या बात हुयी
अभी आए हो और बातें करते हो जाने की,

शाम को रोक लिया है मैंने
इजाज़त चाहिए तुमसे महफ़िल सजाने की,

चलो मुस्कुरा भी दो रोशन कर दो शमाँ,
ज़रूरत अब उजाले की,

मुमकिन है कि अब मुलाक़ात फिर न हो
दिल खोल कर मिलो, न बातें करो जुदाई की,

अभी व्यस्त हूँ जीने में,
कल क्या होगा नही कोई अब फ़िक्र इसकी,

आओ लग जाओ गले कि
कोशिश है इन पलों को मुकम्मल करने की।