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हम बिजली अभियन्ता…..

नौकरी करने चले थे हम सरकारी,
क्या बताएँ बस मति गयी थी मारी।

बिजली अभियन्ता हैं बिजली हम बनाते हैं,
दूर-२ तक पहुँचाते और इसे घर-२ बाँटते हैं।

हवा पानी की तरह ही भाई बिजली भी ज़रूरी है,
है मँहगी मगर सबको सस्ती मिलनी ज़रूरी है।

आवश्यक चीज़ों-सेवाओं का कभी सौदा नही किया जा सकता,
प्रगति को ज़रूरी बिजली को लाभ के लिए बेचा नहीं जा सकता।

बिजली घर-२ की ज़रूरत है, इस हक़ को छीना नहीं जा सकता,
केवल मुनाफ़ा कमाने का इसको साधन बनाया नहीं जा सकता।

जब तक भारत देश से हमारे देखो ग़रीबी नहीं मिटती,
सरकारी सहयोग से ही सबको सस्ती बिजली मिल सकती।

व्यापारी तो केवल व्यापार करने आएँगे
बिना मुनाफ़े के वो क्या ही बिजली बेच पाएँगे।

जब बिजली बन जाएगी मुनाफ़े का सौदा तो सोचिए
क्या किसी गरीब के घर कभी रोशनी हो पाएगी ?

ये बिजली है आम जन मानस का हक़ और सबको ज़रूरी है,
बिना किसी लाभ-हानि के इस पर सरकारी नियंत्रण ज़रूरी है।

माना की कमियाँ हैं अभी कुछ हम सेवा प्रदाताओं में,
तकनीक के प्रयोग से किया जा सकता है सुधार इसमें।

हम बिजली अभियंताओं ने देश हित को क़सम ये खायी है,
करने को देश सेवा हमने न जाने कितनी नौकरियाँ ठुकरायीं हैं।

है योग्यता हममे, हम आज भी अपना हित साध सकते हैं,
हम किसी कोरपोरेट या फिर देश के बाहर भी जा सकते हैं।

मगर देश भक्ति का जज़्बा लिए हम सरकारी सेवाओं में आयें हैं
समाज की भलाई को लेकर हम सब संघर्षों को गले लगाएँ हैं।

निजीकरण बर्दाश्त नहीं ये हमारे और गरीब जनता के साथ धोखा है,
देश की प्रगति में साधक बिजली को हमने ही ग़लत हाथों में जाने से रोका है।

©️~अनुनाद/आनन्द कनौजिया/१७.०९.२०२०

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अलविदा_धोनी ……!

आपके इसी अंदाज के तो कायल हैं हम सब…. बिल्कुल अचानक और अलग निर्णय लेना और उसे सही साबित कर देना। आपने कभी किसी के बारे में नही सोचा कि लोग क्या सोचेंगे, क्या बाते बनाएँगे! आपने बहुत सारी यादें दी जिनमे कुछ विशेष हमेशा याद रहेंगी, जैसे-

*आपका हेलीकाप्टर शॉट याद रहेगा।
*मैदान पर बैटिंग के लिए आने की स्टाइल याद रहेगी।
*छक्के याद आएंगे।
*हेयर स्टाइल याद रहेगा।
*दिल में जो हारने का डर होता था उसे आपने ही खत्म किया।
*डीआरएस सिस्टम को धोनी रिव्यु सिस्टम कर देना याद रहेगा।
*बिना विकेटों को देखे थ्रो मारना तो कोई आपसे सीखे।
*क्रिकेट में आपने अपनी जो छाप छोड़ी उसने क्रिकेट की परिभाषा बदल दी। आप एक अध्याय नही पूरा उपन्यास हो।
*क्रिकेट माइंड गेम है, भारतीय परिदृश्य में ये आपने सत्यापित किया।
*सचिन, दादा और द्रविड़ की विदाई पर दुःख हुआ था पर आपके सन्यास लेने का दुःख नही हुआ। सचिन, दादा, द्रविड़ जैसे खिलाड़ी नहीं मिलेंगें, हमें इसका दुख था। पर आपने तो अपनी कप्तानी में किसी भी खिलाड़ी से मैच जिता दिया इससे जो भरोसा पैदा हुआ उससे दिल सदा मजबूत रहेगा। आपसे नए खिलाडी बहुत कुछ सीखेंगे।
*आपकी हाज़िर जवाबी भी याद आएगी।

छोटे शहर से इतना बड़ा क्रिकेटिंग ब्रेन निकलेगा और दुनिया पर छा जाएगा, पहले कभी किसी ने नही सोचा होगा। छोटे शहर के खिलाड़ियों के लिए तो आपने जो रोशनी दिखाई है वो लाजवाब है !

किसी रिटायरमेंट गेम का लालच नहीं। कोई बड़ा विदाई समारोह नहीं। चुपचाप आये और धमाके किए और चुपचाप चल दिये। मजा आ गया इस स्टाइल में।

छा गए आप ! आज़ाद ख्यालों वाले कप्तान ने आजादी का दिन चुना रिटायर होने के लिए। मजा आ गया।

अलविदा कैप्टेन कूल …….! अलविदा!

ईश्वर आपको सदैव स्वस्थ रखे और बिजली की गति नवाजे 😁
बांग्लादेशी खिलाड़ी की विकेट कीपिंग वाला रन आउट याद रहेगा।

~अनुनाद/आनन्द कनौजिया/१५.०८.२०२०

Retirement video of Dhoni

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स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ 💐

समान शिक्षा, अच्छी स्वास्थ्य सुविधा, सबको रोजगार, भेद-भाव एवं ऊँच-नीच रहित समाज, विचारों की अभिव्यक्ति की आज़ादी की कामना के साथ आप सभी को 74वें स्वतन्त्रता दिवस की शुभकामनाएँ। तिरंगा यूँ ही फहराता रहे।

🇮🇳

जय_हिंद

आज़ाद तन और आज़ाद हो मन,
सच्चे अर्थों में तब आज़ाद वतन।

~अनुनाद/आनन्द कनौजिया/१५.०८.२०२०

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अलविदा राहत साहब

जहाँ पहुँच कर मिलती राहत,
वहाँ को रुख़सत हुए आप राहत!

यूँ बेबाक़ शब्दों में अब कौन गुनगुनाएगा ?
बेख़ौफ़ होकर सियासत को आँखें कौन दिखाएगा ?

सत्ता के आगे जहाँ रुंध जाते हैं गले सबके…!
हुकूमत को उसकी औक़ात कौन दिखाएगा ?

माना कि तेरा जाना तय था, सबका है!
तेरे जाने से ख़ाली हुयी जगह अब कौन भरेगा?

तू गया मगर विरासत में इतना कुछ छोड़ गया …..
इस ख़ज़ाने को देख तू हमको सदा याद आएगा ……..

जब भी खुद को अकेला और कमजोर पाएँगे….
तेरे शब्दों की ताक़त से खुद को मज़बूत पाएँगे!

~अनुनाद/आनन्द कनौजिया/११.०८.२०२०

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राम राज्य…….!

०५ अगस्त २०१९ दिन बुधवार,
तिथि ये कोई साधारण नहीं,
चेहरे आज ये जो शांत दिख रहे,
इनमें छुपा वर्षों का संघर्ष कहीं।

इतिहास तो हमने बहुत पढ़ा था,
आज आँखों से बनते देख रहा हूँ,
गर्व का क्षण है और खुश-किस्मती मेरी,
कीर्तिमान का शिलान्यास देख रहा हूँ।

राम नाम में ही छिपी,
न जाने कितनों की दुनिया,
चेहरे सबके सूखे थे,
प्यासी थी सबकी अँखियाँ।

जिस अयोध्या प्रभु जन्म लिए,
जिस घर भरी किलकारियाँ,
रूप सुहावन राम लला का
उनमें में बसती थी सारी खुशियाँ।

ये कैसा दुर्भाग्य हमारा था,
प्रभु से छिना उनका घर-द्वारा था,
क्षीण हुवा गौरव कौशलपुरी का,
उजड़ा भक्तों का संसार सारा था।

चहुँ ओर जब राम राज्य था,
कहते हैं सब नर में राम बसते थे,
सभी दिशाओं में थी सम्पन्नता
सुना है घी के दिए ही जलते थे।

अब जब राम लला फिर से,
विराजेंगे अपने घर आँगन,
प्रभु राम की कृपा से देखो,
पूरा देश हुवा है मस्त मगन।

गलत हुवा था या अब सही हुवा,
मैं इतिहास नहीं अब खोदूँगा,
राम राज्य की जो है कल्पना वो,
आये धरातल पर बस यही चाहूँगा।

बहुत हो गया द्वंद्व दो पक्षों में.
अब न शेष कोई विषमता हो,
प्रभु भारत देश में अब तो बस,
हिन्दू मुस्लिम में सम रसता हो।

हो जाएँ ख़त्म सारे भेद-भाव,
न ऊँच-नीच न कोई जात-पात,
समान शिक्षा और सबको रोजगार,
हो देश की उन्नति की बात।

सबका साथ सबका विकास हो,
समानता, सम्पन्नता ही हो सर्वस्व,
जगदगुरु बनने का मार्ग प्रशस्त हो,
स्थापित हो फिर से भारत का वर्चस्व।

सियावर राम चंद्र की जय !

सबके राम, सबमें राम !

~अनुनाद/ आनन्द कनौजिया/०५.०८.२०२०

राम लला
निमन्त्रण पत्र

भूमि पूजन