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जीवन के खेल में!

एक-२ पल को जीना ऐसे
जैसे हो एक खिलाड़ी तुम।
जो कुछ भी तुम करना देखो
खुद पर अपनी नज़र रखना॥

दुनिया की भीड़ में देखो
तुम खुद को खो मत देना।
कुछ पल को ही सही तुम
साथ अपने ज़रूर बैठना॥

कभी जो तुम थोड़ा सा
समझने में कमजोर पड़ना।
इर्द-गिर्द तुम अपने सदा
कुछ मित्र समझदार रखना॥

©️®️ज़िन्दगी के खेल में/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/०४.१२.२०२१

Posted in CHAUPAAL (DIL SE DIL TAK), POETRY

सवेरा

सुबह तो हो गयी है !
पर वाक़ई में?
उठ तो गये हो !
पर जागृत हो?
याद तो करते हो !
मन से न ?
मुस्कुराते तो खूब हो !
दिल से न ?

शुभ सुप्रभात 😊

अनुनादित रहें!
आनंदित रहें!

©️®️शुभ प्रभात/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/०३.१२.२०२१

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सलीका !

कुछ इस तरह सलीके से जीने की कोशिश कर रहा हूँ
मैं अपने कमरे में हर टूटी हुई चीजें जोड़कर रख रहा हूँ।

टूटा बिखरा मेरा ये दिल है जिसको फिर से सँवार रहा हूँ
कुछ नहीं अब और टूटने को इसलिए बेख़ौफ़ चल रहा हूँ।

गँवा कर क़ीमती चीजों को दुःख तो बहुत हो रहा लेकिन
मैं अभी भी ज़िन्दा हूँ और बस इसी की ख़ुशियाँ मना रहा हूँ।

©️®️टूटा दिल/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/२१.१२.२०२१

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आतुर

तेरे स्वागत को
आज होकर तैयार
खड़े हैं
सब इंतज़ार में,
ये मौसम…
ये बारिश…
ये चाय…
और हम भी…
बोलो…
मिलने को तुमसे
गुज़ारिश
और कैसे करते?
इससे ज़्यादा
आतुरता
और कैसे दिखाते?
स्वागत को तुम्हारे
और किस-२ को
बुलाते?
©️®️आतुर/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/१६.०९.२०२१

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इस शहर में…

इस शहर में जीने के हैं रास्ते कई
पर अपनी शर्तों पर ज़िन्दगी यहाँ आसान नहीं।

जी हुज़ूरी में मिलती नित तरक़्क़ी नई
पर ग़लत को ग़लत कहना यहाँ आसान नहीं।

इधर-उधर बनाए रखिए नज़रें कई
काम से काम रखने से होता कोई काम नहीं।

ऊँचाई पर पहुँचने को, की कोशिशें कई
इस दौड़ में भीड़ से खुद को बचना आसान नहीं।

बनने को ख़ास हमने बदले कलेवर कई
इतने बदले कि अब अपनी शक़्ल तक याद नहीं।

इस शहर में रहते हैं बड़े नाम कई और
इन नामों में अपना नाम याद रखना आसान नहीं।

©️®️इस शहर में/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/१४.०९.२०२१