Posted in CHAUPAAL (DIL SE DIL TAK)

चले जाना!

तुम जाना !
तो बस,
चले जाना…..
बिना बताए
अचानक
खामोशी से
ऐसा कि
भनक भी न मिले।

दुःख तो होगा
तुम्हारे जाने का
मगर
वो जाने के बाद होगा
और कम होगा
उस दुःख से
जब मुझे
तुम्हारे जाने का
पहले से
पता होगा!

क्यूँकि
पहले से
पता होने पर
दुःख ज़रा पहले
से शुरू होगा
और
इस तरह
दुःख की अवधि
कुछ बढ़ जाएगी।

©️®️चले जाना/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/२२.०१.२०२२

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उथल-पुथल

इस ज़िन्दगी में उथल-पुथल कुछ ऐसी ही है,
क्या करें कि इसमें ख़ूबसूरती भी तो इसी से है ।

©️®️उथल-पुथल/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/ १८.०१.२०२२

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फ़ितरत

ये एक फ़ितरत मैंने खुद पाली है या उस खुदा ने दी,
फ़ायदा छोड़ मैंने सदा अपनी पसंद को तरजीह दी।

हुए कई घाटे मुझे, कभी मैं तो कभी ये लोग कहते हैं,
मगर जाने-अनजाने इस आदत ने मुझे ख़ुशी बहुत दी।

©️®️फ़ितरत/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/ १८.०१.२०२२

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सफ़र की बारिश

जीवन के इस प्रेम सफ़र में तू
इन बूँदों सी झर-झर झरती है
इक आग दहकती नित मुझमें
तू ठंडक सी भीतर उतरती है।

दूर नहीं है मुझसे कभी
तू मुझमें ही तो रहती है
आदतन ये आँखे मेरी तुझे देखने को
मन की खिड़की से अंदर झाँका करती है।

इक ठिठुरन सी मुझमें उठती है
गुनगुनाहट की चाहत उठती है
खुद को समेट कस लूँ तुझको
कुछ ऐसे भी गर्माहट मिलती है।

जो भीतर है मेरे हर मौसम उससे
पूरे बरस मुझमें सावन झरती है
लाख गुजर रही हो ये ज़िन्दगी पर
तुझ पर पुरज़ोर जवानी रहती है।

सफ़र बीत रहा मंज़िल है आने को
विचलित मन ये कोई तो हो मनाने को
मंज़िल के बाद भी सफ़र जारी है रखना
कोई मन-माफ़िक़ साथी हो ये बताने को।

जीवन के इस प्रेम सफ़र में तू
इन बूँदों सी झर-झर झरती हो
इक आग दहकती नित मुझमें
तू ठंडक सी भीतर उतरती हो।

©️®️सफ़र की बारिश/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/०९.०१.२०२२

#रेलगाड़ी #बारिश #सफ़र #अनुनाद #हमाफ़र #प्रेम

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चौराहा और ढलती शाम

ढलती शाम
और ये चौराहा…
दिल में बेचैनी
मन में उम्मीद भी !

शाम ढल गयी
तुम अभी आए नहीं…
दिल घबराए कि
तुम आओगे या नहीं !

उम्मीद ये है कि
तुम अगर आए कभी…
चौराहे पर हूँ ताकता खड़ा कि
यहाँ से तो गुज़रोगे ही !

ढलती शाम
और ये चौराहा…
दिल में बेचैनी
मन में उम्मीद भी !

©️®️चौराहा और ढलती शाम/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/०४.०१.२०२२