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वो दिन …

वो भी क्या दिन थे….

तुम्हारे बिगाड़े हुए
और
तुम्हीं से बने हुए !

वो भी क्या दिन थे।

©️®️वो दिन/अनुनाद/आनन्द/२९.०६.२०२४

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बुराई

समय की धूप में कुछ यूँ तपा हूँ ,
यूँ मैंने ये रंगत सुनहरी पायी है ।
देखी जब भी कोई बुराई किसी में ,
मैंने स्वयं में उस बुराई से दूरी बनाई है।

©️®️बुराई/अनुनाद/आनन्द/०३.०६.२०२४