मेरी कभी किसी से कोई बहस नहीं हुई,
नाजायज़ मुझसे कोई बात कही नहीं गई,
मैं उनसे मिला बस एक साफ़ दर्पण की तरह,
पाकर ख़ुद को सामने कोई शिक़ायत नहीं हुई।
©️®️शिकायत/अनुनाद/आनन्द/१७.०५.२०२४

मेरी कभी किसी से कोई बहस नहीं हुई,
नाजायज़ मुझसे कोई बात कही नहीं गई,
मैं उनसे मिला बस एक साफ़ दर्पण की तरह,
पाकर ख़ुद को सामने कोई शिक़ायत नहीं हुई।
©️®️शिकायत/अनुनाद/आनन्द/१७.०५.२०२४
