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दाँव

भरोसा हमें खुद पर बहुत था
दिल कमबख़्त बहुत मज़बूत था
लगा दिया दाँव पर खुद ही को
और बहुत कुछ खोने को न था !

©️®️दाँव/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/०६.०३.२०२२

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दिलों की दिल्ली

लोग कहते हैं कि दिल्ली जाने के नाम पर हम खुश बहुत होते हैं,
चेहरे पर मुस्कान संग हम अपने लिखने का शौक़ लेकर आयें हैं।

बहुत दिन से सोच रहे थे कि दिल में कोई ख़याल क्यूँ नहीं आता
दिलों के शहर में दिल की कहानी लिखने का बहाना ढूँढने आएँ हैं।

लखनऊ की नवाबी लेकर हम दिल्ली का दिल देखने आएँ हैं,
क़िस्से कहानियों में बूढ़ी दिल्ली को फिर से जवानी देने आएँ हैं।

कितनी कहानियाँ हर वक्त बनती हैं बस तुम्हें कोई खबर नहीं,
एक बस तुम हाँ कर दो तो एक नयी कहानी हम लिखने आए हैं।

©️®️दिलों की दिल्ली/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/ १२.०२.२०२२

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चले जाना!

तुम जाना !
तो बस,
चले जाना…..
बिना बताए
अचानक
खामोशी से
ऐसा कि
भनक भी न मिले।

दुःख तो होगा
तुम्हारे जाने का
मगर
वो जाने के बाद होगा
और कम होगा
उस दुःख से
जब मुझे
तुम्हारे जाने का
पहले से
पता होगा!

क्यूँकि
पहले से
पता होने पर
दुःख ज़रा पहले
से शुरू होगा
और
इस तरह
दुःख की अवधि
कुछ बढ़ जाएगी।

©️®️चले जाना/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/२२.०१.२०२२

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सफ़र की बारिश

जीवन के इस प्रेम सफ़र में तू
इन बूँदों सी झर-झर झरती है
इक आग दहकती नित मुझमें
तू ठंडक सी भीतर उतरती है।

दूर नहीं है मुझसे कभी
तू मुझमें ही तो रहती है
आदतन ये आँखे मेरी तुझे देखने को
मन की खिड़की से अंदर झाँका करती है।

इक ठिठुरन सी मुझमें उठती है
गुनगुनाहट की चाहत उठती है
खुद को समेट कस लूँ तुझको
कुछ ऐसे भी गर्माहट मिलती है।

जो भीतर है मेरे हर मौसम उससे
पूरे बरस मुझमें सावन झरती है
लाख गुजर रही हो ये ज़िन्दगी पर
तुझ पर पुरज़ोर जवानी रहती है।

सफ़र बीत रहा मंज़िल है आने को
विचलित मन ये कोई तो हो मनाने को
मंज़िल के बाद भी सफ़र जारी है रखना
कोई मन-माफ़िक़ साथी हो ये बताने को।

जीवन के इस प्रेम सफ़र में तू
इन बूँदों सी झर-झर झरती हो
इक आग दहकती नित मुझमें
तू ठंडक सी भीतर उतरती हो।

©️®️सफ़र की बारिश/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/०९.०१.२०२२

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नव वर्ष २०२२

नव वर्ष में कोरोना के वेरीयंट जितनी शुभकामनाएँ😆🙏

१. आप भी कोरोना से सीखें और अपने में नित नए बदलाव करते रहें ।

२. दुनिया को आपके अनुसार जीना पड़े न कि आप दुनिया के हिसाब से ।

३. आपके दुश्मन आपसे लड़ने के तरीक़े ढूँढते रहे मगर अन्त में उन्हें आपके साथ ही जीना पड़े।

४. सदैव सुर्ख़ियों में बने रहें और खूब नाम कमाएँ।

५. हमेशा आपके अति आधुनिक संस्करण से मेरी मुलाक़ात हो।

६. आपसे मिलकर मैं सदा प्रेरित होता रहूँ और आपकी तरह आगे बढ़ने की कोशिश करता रहूँ।

७. आपकी ख्याति कोरोना के संक्रमण से भी तेज फैले।

८. परिस्थितियों के अनुसार रहें और नित नयी मज़बूती लेकर और उभर कर सामने आएँ।

९. कोरोना की तरह आपका सिक्का पूरी दुनिया में चले ।

१०. आपके प्रयासों से विश्व के सभी देशों को एक प्लेटफार्म पर आना पड़े।

अन्त में यही कहूँगा कि आपकी छवि अंतर्राष्ट्रीय हो।

जिस तरह आप २०२१ सर्वाइव कर गए,
उसी तरह २०२२ भी सर्वाइव कर जाएँ……..

कोरोना का कोई भी वेरीयंट आएँ,
वो आपका बाल भी बाँका न कर पाए……..

ईश्वर करे कोरोना का सबसे आधुनिक वेरीयंट भी
बस आपके शब्दकोश में इज़ाफ़ा ही कर पाए !

बस उस ईश्वर से यही कामना है मेरे दोस्त कि
हम दोनो एक-दूजे को २०२३ भी विश कर पाएँ।

आपके लिए इससे अच्छी दुवा मैं और नहीं माँग सकता, मगर आपका लालच न ख़त्म हो रहा तो रज़ाई के अंदर से हाथ निकाल कर आप भी अपने ईश्वर से माँग सकते हैं। 😎

इन्हीं सब बातों के साथ आपको नूतन वर्ष की शुभकामनाएँ 💐। ईश्वर आपको और अधिक इम्यून करे और रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करें । आप सदा मेरे साथ अनुनादित रहें।

आपका मित्र-
आनन्द कुमार कनौजिया (अनुनाद वाले)
दिनाँक- ०१.०१.२०२२ (एक और एक बाईस)

©️®️नव वर्ष/अनुनादित आनन्द/०१.०१.२०२२