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कमाई

यह समाचार पढ़कर हतप्रभ होने की ज़रूरत नहीं है। ऐसी कई घटनाएँ आपके आँखों के सामने से होकर गुज़री होंगी। ज़रूरत तो है इससे सीख लेने की। गुण, कलाकारी, शौक सब अपनी जगह हैं और जीविका उपार्जन अपनी जगह। गुण, कलाकारी, शौक इन सबसे मिलने वाला सम्मान क्षणिक ही होता है। अन्ततः प्रश्न जीविका का ही उठता है।
सबसे पहली सीख व्यक्ति को जीवन में जीविका उपार्जन की मिलनी/सीखनी चाहिए। फिर जीविका कमाने के लिए कौन-२ से साधन हो सकते हैं, इसकी सीख मिलनी/सीखनी चाहिए। और माना कि जीविका उपार्जन भी सीख गए तो आगे क्या ? आगे ये कि उपार्जित राशि का प्रबन्धन। ऐसा प्रबंध की उपार्जित राशि भी आपको कमा कर खिलाये।

इसके बाद आप अपना इतिहास देखिये और अपने पैर जमीन पर रखिये। आपको पता होना चाहिए कि इस जीवन को जीने के लिए आधार भूत ज़रूरतें क्या हैं! दिखावे में न पड़ें। यदि आप राजा महाराजा खानदान से नहीं हैं और आप ग़ैर क़ानूनी धंधे या एक्टिविटी नहीं करते हैं तो बस आप अपने पैतृक घर में रहते हुए दाल रोटी में जीना सीखिए और थोड़ा-बहुत जो बचा लेते हैं उसे निवेश करिए।

ये निवेश कई प्रकार का हो सकता है। कुछ नया गुण-ढंग सीखने में निवेश करिये जो आपको जीविका के दूसरे साधन भी उपलब्ध कराये। महत्वाकांक्षा रखिये किन्तु बिना पैसे से मिलने वाली चीजों का जैसे- पद्म-श्री पुरस्कार 🥇 ! ध्यान केवल पैसे कमाने पर होना चाहिए। आपके जीवन का पहला मकसद धन कामना होना चाहिए, फिर रिश्ते और उसके बाद तो कुदरत की मार न मिली तो सब कुछ अपने आप ही मिल जायेगा। मुझे जो सीख मिली है कि रिश्ते सर्व-प्रथम होते हैं किन्तु जीवन के अनुभवों ने कुछ और ही दृश्य दिखाएं हैं इसलिए मैंने धन को सर्व-प्रथम ही रखा है।

कुछ लोग बोलेंगे कि स्वास्थ्य ज्यादा जरुरी है तो भैया मैं ये पोस्ट मैं मरते हुए आदमी के लिए नहीं लिख रहा हूँ। उसके लिए तो अब ये जीवन और मेरा ज्ञान दोनों व्यर्थ ही हैं।

सम्मान, धन, रिश्ते ज्यादा दिन नहीं टिकने वाले ! टिकेगा तो पैसा कमाने की कला।

इसलिए बचपन से ही धन कमाने का तरीका सीखना चालू करिये। पढाई काम भर को कर लीजिये। पैसे रहेंगे तो मंहगी वाली पढाई भी हो जाएगी वरना लोन लेकर पढ़ने की कोई जरुरत नहीं है, क्यूँकि अगर आप उस पढाई से धन कमाना सीख भी गए तो बैंक वाले ही ऐश करेंगे।आपका पेट भरेगा या नहीं ! इसकी कोई गारंटी नहीं।

बड़ी-२ पढ़ाई करने वाले भी धन कमाने का जुगाड़ ही करते हैं और फिर ज्यादा कमाने के लिए भ्रष्टाचार करते हैं ! क्यूँकि वो तो सिर्फ पढ़ें ही हैं न ! धन कमाना तो नहीं सीखे न !

कोविड काल ने तो सिखाया ही है कि जीवन जीने के लिए ज्यादा पैसे जरुरी नहीं है और यदि आपने covishield का टीका लिया है तो फिर और भी घबराने की जरुरत नहीं है। जिसका कोरोना और covishield भी बाल बांका नहीं कर पाया, उसे बस भोजन ही मिल जाये तो वो जी लेगा। बस भोजन भर की व्यवस्था को जरुरी धन कमाने की कला रखिये।

प्रार्थना- बाकी अमीर बनने के रस्ते तो सदैव खुले ही हैं। ईश्वर आपको पेट भरने मात्र को दिहाड़ी मजदूरी करने के लिए मजबूर न करें।

नोट-मुफ्त राशन मिलने के लिए भी लाल कार्ड चाहिए 😎🙈😉 और अगर आप यह पोस्ट पढ़ रहे हैं तो आप लाल कार्ड लायक भी नहीं है👎।

®️®️कमाई/अनुनाद/आनन्द/०३.०५.२०२४

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मंज़िल और रास्ते

ग़र चाहते हो आनन्द मंज़िल पर पहुँचना,
मंज़िल से ज़्यादा रास्तों का ध्यान रखना।

तड़पते रह गये अपन मंज़िल की चाह में,
देखा ही नहीं कि तेरा गाँव भी था राह में।

समय कहाँ रुका है तेरे लिये या मेरे लिये,
निहारते बीते दौर को हाथों में तस्वीर लिए।

मैं फ़क़त ख़्वाब बुनता रहा तुझे पाने को,
रातों में सोया नहीं सोये भाग जगाने को।

मैंने लिखना छोड़ दिया अब क्या फ़ायदा,
भरे घावों को फिर कुरेदने से क्या फ़ायदा।

मैंने नशे करके भी देख लिये ऐ दिलरुबा,
ये कदम लड़खड़ाए तो बस तेरे नाम पर ।

नाम आनन्द है इसलिए खुश तो रहना ही था,
मुझे तेरा नाम और ये ग़म दोनों छुपाना ही था।

मैंने लिखना छोड़ दिया अब क्या फ़ायदा,
भरे घावों को फिर कुरेदने से क्या फ़ायदा।

©️®️मंज़िल और रास्ते/अनुनाद/आनन्द/२७.०४.२४

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बदला कुछ नहीं

गुजरता यहाँ कुछ भी नहीं

होता नया कुछ भी नहीं

नज़रें मिली थी तुझसे बिछड़ते वक़्त

मैं आज भी हूँ ठहरा वहीं !

 

चल तो दिये थे पहुँचे कहीं नहीं

रास्ता लम्बा ये तुझ तक जाता नहीं

मंज़िल की खोज मैं क्यों करता भला

जब सफ़र में तू हमसफ़र नहीं !

 

उम्र बीती पर बीता कुछ नहीं

आगे बढ़े पर बढ़ा कुछ भी नहीं

२३ से २४ हुवा पर पूछों बदला क्या

यादें धुँधली हुईं भूला कुछ नहीं!

©️®️बदला कुछ नहीं/अनुनाद/आनन्द/३१.१२.२०२३

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मुस्कुरा दीजिए

यूँ भी क्यूँ इतना शर्म कीजिए,
इस ओर भी इक नज़र कीजिए …

परेशानी अपनी कुछ यूँ कम कीजिए,
कोई काम हो तो हमारा नाम लीजिए …

दिलों के सौदागर से एक सौदा कीजिए,
दिल की एक कहानी हमारे सुपुर्द कीजिए …

शोख़ इस चेहरे से क़िस्से हज़ार कीजिए,
बस इन क़िस्सों में नाम हमारा कीजिए …

स्याही ये लिखने की न यूँ जाया कीजिए,
सूखने से पहले कोई तो इशारा कीजिए …

मौक़ा निकाल कर लखनऊ घूम लीजिए,
कई पार्क हैं किसी में हमसे मिल लीजिए …

नवाबों के शहर में हैं बस इतना कीजिए,
देख कर हमारी ओर बस मुस्कुरा दीजिए …

©️®️मुस्कुरा दीजिए/अनुनाद/आनन्द/१७.१२.२०२३

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लखनऊ की बारिश (११.०९.२०२३)

अमां ऐसी भी कोई बात होती है,
भला ऐसी भी कोई रात होती है….!

मुझे सोते से जगाया गया कि देखो जरा
मैंने कहा इतने शोर में भी कोई बात होती है….!

कल रात हमने देखा ऐसा मंज़र
ऐसी भी भयानक बरसात होती है….!

किसी हृदय की प्रबल वेदना होगी
वरना कहाँ अब ऐसी बरसात होती है….!

यूँ चमकती बिजली का गरजते जाना
डरते दिल ने कहा हर रात की सुबह होती है….!

फूट-फूट कर भर दम रोना-दहाड़ना
ये टूटे दिल की आम बात होती है….!

ये बेचैनी में रात-२ भर करवटें बदलना
ये नये आशिक़ों की पुरानी बात होती है….!

दिल में जहर दबाने से कहीं अच्छा
फट पड़ना भी राहत की बात होती है….!

जिसने जगाया मुझे उसे सोने को कह दिया
ऐसी रात में सोते रहने की अलग बात होती है….!

कल मैं और प्रकृति दोनो अनुनादित थे,
दिल की बात का इजहार जरूरी बात होती है….!

©️®️ लखनऊ की बारिश/अनुनाद/आनन्द/११.०९.२०२३