Posted in POETRY

अधूरी मुलाकात …

ये जो तुम आधा सा मुस्कुराते हो,
कोई बात होठों से दबाकर रखना चाहते हो!

दिल की बात करूँ, कुछ पूँछूँ, तो मौन रहते हो,
मगर सामने खामोश खड़े रहकर तुम सब कह देते हो!

खामोशियाँ भी हमेशा काम नहीं आती देखो,
तुम अपनों से ऐसा भी क्या राज रखना चाहते हो!

एक उम्र मिली है तुमको हमको जीने को,
क्यूँ नहीं इसके कुछ पल खुलकर साथ मेरे बिताते हो!

एक झलक ही मिली थी कि तुम चल दिये,
आ जाओ कि आँखों की प्यास और क्यूँ बढ़ाते हो?

©️अनुनाद/आनन्द कनौजिया/१३.०१.२०२१