Posted in CHAUPAAL (DIL SE DIL TAK)

भूल गए!

दिन, तिथि, जगह, शाम, सब मुक़र्रर थी मिलने की,
पलों के साथ में उम्र भर के साथ का वादा लेना भूल गए।

मिलने से ज़्यादा ख़ुशी तो हमें उनके मिलने के वादे से थी,
इतनी ख़ुशी में हम दिल की बात कहना ही भूल गए।

उनके आते ही न जाने दिमाग़ ने ये कैसी हरकत की,
मिलन के पलों को गिनने में हम उन्हें जीना भूल गए।

सामने वो और उनकी कशिश से भरी मद्धम मुस्कान थी,
उनकी मद भरी आँखों में हम बस सारी तैराकी भूल गए।

इतने सलीके से बैठे हैं सामने जैसे सफ़ेद मूरत मोम की,
इधर हम हाथ-पैर-आँखो को सम्भालने का तरीक़ा भूल गए।

गला ऐसा फिसला कि बोले भी और कोई आवाज़ न की,
धड़कनों के शोर में अपनी ही आवाज़ को सुनना भूल गए।

दिन, तिथि, जगह, शाम, सब मुक़र्रर थी मिलने की,
इतनी ख़ुशी में हम दिल की बात कहना ही भूल गए….
पलों के साथ में उम्र भर के साथ का वादा लेना भूल गए।

©️®️भूल गए/अनुनाद/आनन्द/२६.०५.२०२२

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ख़ूबसूरती

“ख़ूबसूरत लोग अगर अनजान हों तो अधिक ख़ूबसूरत और आकर्षक हो जाते हैं!”
😇
😍
😎

कुल मिलाकर ख़ूबसूरती एक वैचारिक fantacy के सिवा कुछ भी नहीं! यह fantacy एक व्यक्ति विशेष के जीवन भर की कल्पनाओं का समूह भर है जिसे वो किसी अनजान और ख़ूबसूरत व्यक्ति को देखकर एक पल विशेष में अनुभव कर लेता है। इन कल्पनाओं और उस देखे गए ख़ूबसूरत व्यक्ति में कोई रिश्ता नहीं होता। ये देखने वाले व्यक्ति के अंदर चल रही काल्पनिक कहानी मात्र होती है। ऐसी स्थिति में देखने वाले व्यक्ति को देखे गए व्यक्ति को लेकर कोई भी निर्णय लेने से बचना चाहिए।

ख़ूबसूरती एक मृग तृष्णा है। वास्तविकता में इसका कोई स्वरूप नहीं। सब कुछ आपके दिमाग़ के भीतर है। वहीं से आप इसे महसूस कर सकते हैं। तो अगली बार आपको ख़ूबसूरती का एहसास लेना हो तो इसे दूसरों में न ढूँढे। बस अपने दिमाग़ को इस हिसाब से अभ्यस्त करिए कि वो जब चाहे स्वयं इस ख़ूबसूरती का रसास्वादन कर ले। इस तरह आपको दूसरों से मिलने वाली निराशा से भी दो-चार नहीं होना पड़ेगा।

ऊपर वाले पैराग्राफ़ को देखकर कुछ ख़ुराफ़ाती लोग कई स्तर तक के मतलब निकाल सकते हैं🤣😆 और हास-परिहास कर सकते हैं! बस इन्हीं लोगों की वजह से मेरे लिखने की सार्थकता बढ़ जाती है 😉

यह सब लिखते वक्त मैंने बहुत सारा दिमाग़ लगाया है! ये पढ़ने में अच्छा लग सकता है मगर असल में ऐसा हो ही नहीं सकता क्यूँकि दुनिया दिल से चलती है! बिना चूतियापे के कोई कहानी बन ही नहीं सकती😋 और बिना कहानी के तो क्या ही मज़ा है जीने में 😁

इसलिए इस संसार की गति बनाए रखने के लिए मूर्खों की ज़रूरत ज़्यादा है……

मैंने भी खूब मूर्खता की है और सफ़र अभी जारी है….

खोज अभी जारी है……..

एक नयी मूर्खता करने की !

इसमें आपका साथ मिल जाएगा तो मज़ा दो गुने से चार गुने तक होने की सम्भावना है 🙃

©️®️ख़ूबसूरती/अनुनाद/आनन्द/११.०५.२०२२

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नीलिमा जी 😍😘💐🌹

नीलिमा जी ……🌹

ये पंक्तियाँ ताज़ा-२ सिर्फ़ आप के लिए 💐

नोट- बाकी के प्रेमी युगल सुविधानुसार इन पंक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं।

………………………………

नींद भला कैसे आए
जब सामने तू हो !

दरिया शांत कैसे हो
जब साहिल तू हो !

सम्भालूँ कैसे हसरतों को
जब बग़ल में तू हो !

बहकना मेरा कब बुरा है
जब नशा तेरा हो !

कदम तेज कैसे रखूँ
जब सफ़र में संग तू हो !

मंज़िल किसे, क्यूँ चाहिए
जब हासिल तू हो !

फ़रवरी १४ हो या १५, क्या फर्क़
जब मोहब्बत तू हो !

……………………………………

©️®️वैलेंटाइन डे/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/१४.०२.२०२२

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आतुर

तेरे स्वागत को
आज होकर तैयार
खड़े हैं
सब इंतज़ार में,
ये मौसम…
ये बारिश…
ये चाय…
और हम भी…
बोलो…
मिलने को तुमसे
गुज़ारिश
और कैसे करते?
इससे ज़्यादा
आतुरता
और कैसे दिखाते?
स्वागत को तुम्हारे
और किस-२ को
बुलाते?
©️®️आतुर/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/१६.०९.२०२१

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मैं, बारिश और इश्क़…

बारिश
जब भी बरसती है
मुझ पर यूँ गिरती है
जैसी सूखी पथराई मिट्टी पर
छन से
और फिर गहरे उतर जाती है
रिसती चली जाती है
भीतर तक
धीरे-धीरे
और बदल देती है मुझे
कर देती है नम
इस पत्थर दिल को
जैसे तुमने किया था….

बारिश
जब भी बरसती है
मुझ पर यूँ गिरती है
जैसे सूखे धूल जमे पत्तों पर
धुल जाती है सारी धूल
बहा ले जाती है सारी गंदगी
और चमक उठते हैं पत्ते
इसी तरह जब तुम्हारी यादों पर
पड़ने लगती है धूल
तो ये बारिश करती है कमाल
भिगोती है ये मुझे और फिर
चमक उठती हैं तेरी यादें
मेरे मानस पटल पर।

बारिश
जब भी बरसती है
मुझ पर यूँ गिरती है
आती है खुशबू
सोंधी-सोंधी
मिट्टी की
हो उठता हूँ तरो-ताजा
महक उठता हूँ भरपूर
और खो जाता हूँ
कहीं दूर नीरव में
बिल्कुल वैसे जैसे
पहली बार तुम बगल में बैठे थे।

बारिश
जब भी बरसती है
मुझ पर यूँ गिरती है
पैदा करती हैं कम्पन
होता है स्पंदन
उठती है सिहरन
मचलता है चितवन
संभालने को धड़कन
मैं करता हूँ प्रयत्न
साधता हूँ मैं खुद को
बिल्कुल वैसे जैसे
तेरी पहली छुवन।

बारिश
जब भी बरसती है
मुझ पर यूँ गिरती है
जैसे ……

©️®️बारिश का असर/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/२९.०५.२०२१