Posted in CHAUPAAL (DIL SE DIL TAK)

साथ …

बढ़ती उम्र का देखो क्या अजब फलसफा है,
साथ छोड़कर निकल रहे हैं साथ चलने वाले।

वादा था कि हम मिलते रहेंगें हज़ार कोशिशें करके,
और अब देखो कि सारी कोशिश बहाने खोजने की हो रही।

तुम्हारे लिए तो ये कुछ पल, दिन, महीने ही गुजरें है,
और यहाँ तुम्हारे बिन हमारी तो सदियाँ गुज़र गयीं।

एक मासूम सूरत थी बिल्कुल भोली सी, हाँ तेरी ही तो थी,
तेरे बिछड़ने फिर न मिलने से देखो आज भी बिल्कुल वैसी ही है।

बढ़ती उम्र का भी नही हुवा कोई असर आज तक देखो,
मेरे ख़्यालों में तेरा चेहरा आज भी पहले जैसा है।

एक ख्वाहिश थी साथ जीने-मरने की और अब कमाल तो देखो,
न हो मुलाकात उनसे अब हम इसकी दुवा दिन-रात करते हैं।

उम्र ही तो काटनी है, कट रही है, कट ही जाएगी,
साथ तेरा हो या तेरी यादों का, नशा एक बराबर है।

अनुनाद/यादों का आनन्द/२३.१२.२०२०

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सरयू का पुल

ये सरयू में बाढ़ का पानी ऐसे है जैसे,
सामने तुम खड़े हो मुस्कुराते आँचल फैलाए।
ये किनारों की हरियाली जैसे रूपट्टे में कोई कढ़ाई
हम रहते खड़े एक टक तुझको बस निहारते ही जाएँ।।

लो फैला दी हमने बाहें अपनी अब,
बस तुम्हारा आकर गले लगना बाकी है।
अधूरे थे हम ये तुमको देखा तो जाना,
आ भी जाओ कि पूरा होना बाकी है।।

ये जो पुल है सरयू तुम पर
इसे बनना नही चाहिए था।
तुम्हारा साथ इतनी जल्दी बीत जाए,
हमें ये तो कभी नही चाहिए था।।

तुझमें उतर कर अगर पार करते,
तो मिलने का मजा कुछ और था।
डूबते तो हमेशा को तेरे हो जाते और,
पार होते तो जीने को यादों में ये सफर था।।

~अनुनाद/आनन्द कनौजिया/३०.०७.२०२०

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सरयू और अयोध्या

काश हमारा तुम्हारा मिलन कुछ यूं हो जाए,
दिन रात के मिलने को जैसे संध्या हो जाए।

श्री राम की हम पर बस इतनी कृपा हो जाए,
तुम सरयू हो जाओ और हम अयोध्या हो जाएँ।

~अनुनाद/ आनन्द कनौजिया/२९.०७.२०२०