Posted in CHAUPAAL (DIL SE DIL TAK), POETRY

शाम का चाँद

शाम का चाँद…… कितना अजीब लगता है न ! शायद न भी लगता हो ! लेकिन अगर सोच कर देखा जाये तो कुछ अजीब ही लगेगा। हमेशा से चाँद को रात में ही निकलना होता है या फिर हम उसके रात में ही निकलने की बात करते हैं। शायद हमने ही तय कर दिया है कि चाँद रात में निकलता है इसलिए जब कभी हम शाम में, रात से पहले चाँद को निकला हुआ देखते हैं तो अजीब लगता है। शायद रवायतें यूँ ही बनती हैं और जब कोई इन रवायतों से बाहर निकल कर कुछ अलग करता है तो उसकी ये हरकत अजीब अथवा पागलपन की श्रेणी में रखी जाती हैं।

आज शाम बालकनी में लगाए छोटी सी बागवानी में यूँ ही टहल रहा था तो चाँद पर नज़र पड़ी। अरे भाई … इन्हें इतनी जल्दी क्या थी जो अभी से चले आये ! कोई बात तो जरूर है ! हम ठहरे आशिक मिज़ाज आदमी ! सो हर किसी को इश्क़ में ही समझते हैं! तो हमें लगा कि हो न हो ये चाँद भी किसी के इश्क़ में जरूर है इसलिए जिसके इश्क़ में हैं उसके दर्शन को आतुर होकर समय का हिसाब रखना भूल गए। आतुरता तो बस देखते ही बन रही थी चाँद महाशय की। इतने कोहरे और इतने ठंड के बीच किसी को देखने की आस लगाए टिमटिमा रहे थे कि बस इनके महबूब की नज़र पड़ जाये इन पर और इनकी आज की हाज़िरी कुछ जल्दी लग जाये। दिल की बात तो कह नहीं सकते तो अपने हाव-भाव और आतुरता से सब जाहिर कर रहे थे। शायद इनके महबूब को इनकी इस अजीब हरकत से इनके इश्क़ का आभास हो जाये और इनका काम बन जाये।

प्यार में पड़ा व्यक्ति भी कुछ ऐसा ही होता है न ! हर वक़्त एक ही ख्याल ! सारी सुध-बुध खो बैठता है और होठों पर एक ही नाम – महबूब का! उसकी सुबह उसी के नाम से शुरू, शाम उसके इंतज़ार में और रात उसकी जुदाई में रोकर ख़त्म होती है। दुनिया की नज़र में ऐसा व्यक्ति पागल के सिवा कुछ और नहीं दिखता। ऐसा व्यक्ति रेडियो एक्टिव मैटेरियल जैसा होता है बिलकुल टूट कर बिखरने को तैयार ! बस कोई उसके सामने उसके महबूब का नाम रुपी न्यूट्रान उसकी ओर उछाल दे। हाहा……कितनी अजीब स्थिति होती है !शब्दों में बयाँ करना मुश्किल हैं इसलिए तो इंसान ने गीत संगीत धुन ग़ज़ल आदि रचे हैं और अपने दिल की बात करने को वाद्य यंत्रों का सहारा लेता है। वरना दिल के भावों को इतना सटीक संचारित कैसे किया जाता!

ईश्वर ने बहुत सोचकर ये शाम बनायी होगी। दिन और रात की सन्धि बेला। तुम्हारे बिना गुज़रते दिन को रोकने की कोशिश और तुम्हारे बिना आती रात से दूर भागने का प्रयास। ऐसे समय में तुम्हारा न होना ही ठीक है, बस एक मित्र हो जिससे तुम्हारीं बातें की जा सके ! ढेरों बातें ! बातें जो कभी ख़त्म न होंगी ! न जानें कितनी शामें और कितनी रातें कट सकती हैं तुम्हारी बातों में !

ये चाँद आज तुम्हारे लिए नहीं आया है…… ये किसी मित्र की खोज में आया है। जिसके साथ ये शाम गुज़ार सके, तुम्हारी बातें करते हुए। आज इसे मैं मिल गया! मैं भी बच कर निकलना चाह रहा था लेकिन बच न पाया और इसकी पूरी कहानी सुननी पड़ी। चाँद का यूँ भटकना, शाम और रात का ख्याल न रखना, नशेड़ियों की तरह कभी इधर तो कभी उधर, पागलों सी हरकत कोई अजीब और नयी चीज नहीं है। इश्क में पड़े व्यक्ति की ये बिलकुल सामान्य हरकत है !

दिल कुछ यूँ गुनगुनाता है कि :-

आज चाँद को शाम में ही निकला हुवा देखा,

तेरे इश्क़ में उसने समय का ख्याल ही नहीं रखा।

पाने को झलक तेरी वो दीवाना आतुर बड़ा था,

पागलपन में देखो वो रात से पहले आकर खड़ा था।

उसके इस क़दर बेवक़्त चले आने से बातें खूब बनेंगी,

मगर देखो बिन महबूब एक दीवाने की रात कैसे कटेगी।

अब चले ही आये हो तो बैठो कुछ पल को हमारे साथ,

बेचैन दिल को तुम्हारे अच्छा लगेगा इस दिल जले का साथ।

भटकना तुम्हारा और मेरी गली आ जाना कोई संयोग नहीं,

एक भटके हुए मुसाफ़िर का ठिकाना तुमको मिलेगा यहीं।

कुछ तुम अपनी सुनाना, कुछ हम अपनी आप बीती सुनाएंगे,

आज की पूरी रात हम दोनों बस उनकी बातों में ही बिताएंगे।

देखो चाँद एक नसीहत ले लो मेरी आगे काम आएगी,

यूँ बेवजह बेवक़्त न निकला करो वरना कहानी बन जाएगी।

जब भी निकलने का मन करे और दिल बेहद बेताब हो,

याद मुझको करना कि आ जाओ आज शाम कुछ बात हो।

ये दुनिया रवायतों की अजीब है, तुमको हमको न समझ पायेगी ,

इश्क़ करने वालों की बिरादरी ही तुम्हारी आतुरता समझ पायेगी।

देखो आगे से बेचैनी में बिना समय इधर-उधर न निकल जाना,

बहलाने को मन तुम दबे पैर चुपके से हमारी गली चले आना।

©️अनुनाद/आनन्द कनौजिया/२४.०१.२०२१

Posted in CHAUPAAL (DIL SE DIL TAK)

बागवानी

आज कल बागवानी का शौक चढ़ा है! एक आदमी के ज्यादा शौक नहीं होते। पद, शोहरत, पैसा और इश्क…. ! पूरा बचपन और जवानी इन्हीं चार चीजों के पीछे भागता है और पाने की कोशिश करता है। हमने भी की। सब कुछ तो मिला मगर शोहरत मिलना बाकी है। इतनी शोहरत चाहिए कि बाहर निकलूँ तो हर वक़्त लोगों से बच के निकलना पड़े। ऐसे शोहरत के बाद जब भी आपको सुकून के दो पल मिलेंगे उसकी कीमत क्या ही आँकी जाए। उन्हीं सुकून के पलों में हम बागवानी करेंगें। उसके लिए तो बागवानी सीखनी पड़ेगी…! तो बस उसी की तैयारी चल रही है……

निजी जीवन में खुद को प्रकृति के नजदीक ले जाना है और बस देते रहना ही सीखना है….. बाँटना है…. सब कुछ …. सब में ….. उसके पहले खूब बटोरना भी है 😜😆

मुन्नू (सिंह नर्सरी वाले) भैया को धन्यवाद🙏

अनुनाद/माली आनन्द/२०.१२.२०२०

Posted in POETRY

शिकायतें….. जीवन से!

ये सूरज सुर्ख लाल है बिल्कुल मेरी तरह लगता है,
इस ढलती शाम से बेहद नाराज लगता है।

कितना कुछ दिया है ऐ जिन्दगी तूने जीने को,
कितना कुछ रोज रह जाता है मेरे समेटने को!

तू ही बता ऐ नींद कैसे गले लगा लूँ तुझे मैं,
मंजिल को दो कदम ही बढ़ा था और रात हो गई।

तेरे साथ की खुशबू से सराबोर महक रहा हूँ इस कदर,
कि इत्र के सौदागर थे और हम अपना सारा कारोबार भूल गए।

साथ होते हो तो दूर जाने का डर लगा रहता है, तुम्हें पता था!
ख़त्म करने को मेरा डर इतनी भी दूर जाने की क्या ज़रूरत थी?

एक मुलाकात को देखो कितने दिन पलों में बीत गए,
चेहरा तेरा देखने को कमबख़्त ये पलकें झपकना भूल गए।

खोकर ख़्वाबों को हमने इतनी सी उम्र में बस यही सीखा है ,
पछतावा कोई नहीं अब बस उन ख़्वाबों की यादों में जीना है।

एक सीख है जो तू दे गया मुझे, अब ताउम्र साथ रहेगी,
होशियार था तू, तुझे पता था कि ये साथ उम्र भर का नहीं।

राह ताकते रहे कि दिल के इस घरौंदे में तुम लौट आओगे एक दिन,
लो शाम ढल गई इंतजार में और हम राह में दिया जलाना भूल गए।

ये सूरज सुर्ख लाल है बिल्कुल मेरी तरह लगता है,
इस ढलती शाम से बेहद नाराज लगता है।

©अनुनाद/आनन्द कनौजिया/२५.११.२०२०

Posted in CHAUPAAL (DIL SE DIL TAK)

रिपीट मोड!

ज़िन्दगी रिपीट मोड में चल रही है…. डेली एक ही रूटीन फॉलो हो रहा है वो भी बिना किसी इंच भर के डेविएशन के ! कैसे कुछ नया होगा? कैसे लाइफ रोमांचकारी होगी? समय रहते ही कुछ नया ऐड करना होगा और कुछ पुराना डिलीट करने होगा । वरना……… जीवन तो चल ही रह है! एक दिन कट/काट ही जायेगा😜।

उम्मीद है आपकी बेहतर चल रही होगी … बिल्कुल रोमांचक! 😎 अगर नहीं तो … यही समय है परिवर्तन का🤗।

सोचिये……..!

कुछ नया ऐड करने की सलाह भी दे दीजिएगा….🙏 घनिष्ठ मित्र साथ बैठकर देंगे तो अच्छा लगेगा। हमारी बालकनी भी तैयार है😉।

©अनुनाद/चिन्तक आनन्द/२३.११.२०२०

Posted in CHAUPAAL (DIL SE DIL TAK)

लॉन्ग ड्राइव

लॉन्ग ड्राइव भी एक बेमिसाल चीज है। लॉन्ग ड्राइव का नाम पढ़कर कपल्स के चेहरों पर खुराफात वाली मुस्कान आ गयी होगी 😁 खैर . . . . . . ! सामान्यतः किसी का साथ हो सफर में और ये साथ आपके पसन्दीदा व्यक्ति का हो तो सफर का मजा बढ़ जाता है। लॉन्ग ड्राइव के साथ भी ये वाला नियम लागू होता है। मगर मेरे केस में ऐसा नहीं है। मुझे अकेले ही पसंद है लॉन्ग ड्राइव करना। कारण. . . . . .? बस यही जानने के लिए आज के लेख में चर्चा की जाएगी। वैसे सफर से सम्बंधित हर लॉन्ग ड्राइव, लॉन्ग ड्राइव नहीं होती। लॉन्ग ड्राइव बिना मकसद की होने वाली ड्राइव होती है, जो या तो खुद की खोज के लिए होती है या किसी दूसरे के अंदर कुछ खोजने को ! अब लोग दूसरों में क्या खोजते हैं ये आप लोग कमेंट में बताइएगा 😉

मेरे लिए लॉन्ग ड्राइव एकान्त प्रदान करने वाली व्यवस्था है जिसे मैं बाइस की उम्र से लगातार खोजता रहता हूँ। एकान्त के इस समय में हर उस चीज के बारे में सोचता हूँ जो करना चाहता था और कर नहीं पाया। न न न न न प्यार मोहब्बत पर मत जाइएगा, वो तो मैं आज भी कर रहा हूँ और करता रहूँगा 😍 अब विचार में क्या चीजें आएँगी, ये रस्ते में मिलने वाले दृश्यों पर निर्भर करती हैं। जैसे बाइक सवार कपल्स को आपस में डाटा ट्रांसफर करते हुए देखना 😝 एक पल को ३१ वर्ष का व्यक्ति भी पुनः २१ का होना चाहता है 😎 ३१ वर्ष का आदमी ये सब नही कर सकता । इसके लिए २१ वर्ष वाला खालीपन और जिम्मेदारी का अभाव होना चाहिए। ३१ का आदमी खाली हो भी जाये तो समाज और परिवार की गालियाँ खाली नहीं रहने देंगी। खैर . . . . . . .   इसी तरह मैं एक उपन्यास लिखने की प्लानिंग, हिंदी/संस्कृत में डॉक्ट्रेट करना, अपना पोएट्री कैफ़े खोलना जैसी कई ख्याल बुनता हूँ। अगर ये सब न हो पाए तो कम से कम पहाड़ों पर जाकर अंडे और मैगी का ठेला जरूर लगाना चाहूँगा। अगर मैं इंजीनियर न होता तो ऑमलेट बनाने वाला होता। आखिर में कुछ न कर पाया तो ट्रैवेल ब्लॉगर बन जाऊँगा। इसके लिए एक खादी का झोला, एक मोटा चश्मा, एक मस्त मँहगा DSLR , एक बढ़िया स्पोर्ट शूज, दो-चार इटैलियन हैंड मेड डायरी और जेब में २-४ हज़ार रुपये। बस बिना बताये घर से गायब…… कुछ सालों बाद लौटेंगे नाम कमाकर! एक फेमस ब्लॉगर बनके 😇

सपने बुनने के साथ-२ लॉन्ग ड्राइव में आपको फ़्लैश बैक में जाने को मिलता है। पीछे जाकर अपने आपको देखना और फिर खुद को चूतिया बोलने का भी अलग सुख है। ज़माने के सामने खुद को चूतिया बोलने में थोड़ी शर्म आती है। अब चूतिया भी पूरी दम से बोलते हैं और इसके साथ डी के बोस भी। इतना खो जाते हैं कि अभी पीछे वाले खुद को इतनी तेज चट्ठा मारेंगे और वो गलती करने से रोक लेंगे जिसकी वजह से आज परेशान हैं। इतने चूतिया कैसे हो सकते थे हम ! फिर क्या . . . . . ! मन मसोस कर रह जाते हैं ! क्या करें खुद से प्यार भी है तो माफ़ भी कर देते हैं खुद को। इस पूरे समय में हम चिल्ला-२ कर खुद से बात कर रहे होते हैं। कोई साधारण व्यक्ति देख ले तो आगरा छोड़ आये। खैर . . . . . इस दौरान गाड़ी ऑटो पायलट पर रहती है और हमें कुछ आभास नहीं। ईश्वर ने शरीर को गज़ब बनाया है। हमारे शरीर को दिल और दिमाग दोनों पर ही भरोसा नहीं होता। इसलिए कुछ काम वो इन दोनों को बाईपास कर खुद कर लेता है, जैसे ये ड्राइविंग !

इस बीच रास्ते में घने बादल दिखाई दे जाएँ और बारिश हो जाये तो अमोल पालेकर बनते देर नहीं लगता ! महीन सी मुस्कराहट आपके चेहरे पर और रोमांस के कीड़े कुलबुलाने लगते हैं……  कुछ पल को पहाड़ों की पिछली यात्रा याद आ जाती है ! साथ में तुम और याद आ जाते हो! इसी बीच हम “गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा . . . . . . ” वाला गाना गाने ही वाले होते हैं कि साला अगले पल ही बारिश बंद और चमकदार धूप ! अरमान जागने से पहले ही पानी फिर जाता है। लॉन्ग ड्राइव में ये दिक्कत बहुत होती है ! तब तो और ज्यादा जब आप उत्तर प्रदेश में ड्राइव कर रहे हों। 

औरतें. . . . .  सॉरी! लड़कियाँ . . . . . , हाँ ! लड़कियाँ लॉन्ग ड्राइव में क्या सोचती हैं, इसकी मुझे ज्यादा खबर नहीं ! शायद मेक अप के बारे में या फिर अगली पार्टी में क्या पहनना है! बाकी और चीजों के बारे में सोचने के लिए लड़के तो हैं ही! वो सोचेंगे ही! हैम क्यूँ सोचे! (अगर आप मेरे विचार से सहमति नहीं रखती हैं तो आप अपवाद हैं और यूनिक हैं। हमारी खूब जमेगी।) 

ख़ैर. . . . . तुम तो हमारे बारे में ही सोचती होगी 💝।

ऊपर की चर्चा के अलावा मैं एक और चीज जो सोचता हूँ वो है पैसा! ढेर सारा पैसा। इतना कि बस लुटाता जाऊँ। दोस्तों में, परिवार में, समाज में, हर किसी ऐरे-गैरे चलते-फिरते लोगों में। आदमी की इज्जत ही तब है जब वो सब पर पैसा लुटाये। सूरत और सीरत से कुछ नहीं होता। आदमी को गर्व भी होता है पैसे को अपनों या गैरों के बीच खर्च करके। एक आत्म सुख मिलता है। बिलकुल वैसा सुख जैसा तथागत बुद्ध को ज्ञान प्राप्त होने के बाद मिला होगा। शायद ! कार से चलो और चौराहे पर कोई आपसे हाथ फैलाकर माँगे और आप उसे आगे बढ़ने का इशारा कर दें, मुझे ये नहीं अच्छा लगता। गरीबों वाली फीलिंग आती है। जब तक उस गरीब को २-४ हज़ार दे न दो तब तक कोई बात? धिक्कार आदमी होने पर! इस लॉन्ग ड्राइव के दौरान हम पूरी दुनिया की गरीबी दूर कर चुके होते हैं 😜

अब पैसे कमाने के लिए कोई बिज़नेस आईडिया भी चाहिए। बदलते दौर के साथ एक नया आईडिया। ऐसा आईडिया जो आपको रातों रात अमीर नहीं बहुत अमीर बना दें। बिलकुल कठोर निर्णय, अब तो कर ही देंगे ये आईडिया इम्प्लीमेंट। लेकिन लॉन्ग ड्राइव ख़त्म होते-२ ही दिल हल्का होने लगता है की अगर फेल हो गए तो ? न न न न न न . . . . .  रिस्क है ! बहुत रिस्क है।

फिर सोचते हैं कि कोई न ! करते हैं ! देखेंगे ! फेल हो गए तो भी ऑप्शन तो है न! पहाड़ों पर अंडे और मैगी का ठेला लगाने का! तुम तो घूमने आओगे न वहाँ! मैगी खाने हमारी दुकान पर! हम अपने हाथ से बनाकर ऑमलेट भी खिलाएँगे 💖 तुम खाना  . . . . . और हम तुम्हे ताकेंगे ! बेशर्मों की तरह ! 

ख़ैर  . . . . ! प्यार में सब जायज है। ताकना भी ! ऐसा सोचना भी !

और हाँ. . . .  लॉन्ग ड्राइव में कोई टोकने वाला भी नहीं 😁

©अनुनाद /आनन्द कनौजिया /२९.१०.२०२० 

फोटू साभार इंटरनेट।