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बागवानी

आज कल बागवानी का शौक चढ़ा है! एक आदमी के ज्यादा शौक नहीं होते। पद, शोहरत, पैसा और इश्क…. ! पूरा बचपन और जवानी इन्हीं चार चीजों के पीछे भागता है और पाने की कोशिश करता है। हमने भी की। सब कुछ तो मिला मगर शोहरत मिलना बाकी है। इतनी शोहरत चाहिए कि बाहर निकलूँ तो हर वक़्त लोगों से बच के निकलना पड़े। ऐसे शोहरत के बाद जब भी आपको सुकून के दो पल मिलेंगे उसकी कीमत क्या ही आँकी जाए। उन्हीं सुकून के पलों में हम बागवानी करेंगें। उसके लिए तो बागवानी सीखनी पड़ेगी…! तो बस उसी की तैयारी चल रही है……

निजी जीवन में खुद को प्रकृति के नजदीक ले जाना है और बस देते रहना ही सीखना है….. बाँटना है…. सब कुछ …. सब में ….. उसके पहले खूब बटोरना भी है 😜😆

मुन्नू (सिंह नर्सरी वाले) भैया को धन्यवाद🙏

अनुनाद/माली आनन्द/२०.१२.२०२०

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अब दिल्ली दूर नहीं….

अब ज़िन्दगी अलग लेवल पर जीने का मन हो रहा है। शिक्षा, नौकरी, शादी, बच्चे, और ३० से अधिक उम्र के अनुभव से ये पता चला कि ये सब जीवन के लक्ष्य नहीं थे। ये सब तो केवल इंसान को व्यस्त रखने के तरीके भर थे। नौकरी तो कभी भी जीवन का लक्ष्य नहीं होना चाहिए। इस पर एक नौकरी तो उम्र भर कभी नहीं करनी चाहिए। इसे जितनी जल्दी समझ लें उतना बेहतर। प्रतिदिन एक काम करके आप तालाब का पानी हो जाते हैं।

अब सोच रहे हैं कि कोई व्यवसाय किया जाए और इतना कमा लें कि जीविकोपार्जन के साथ-२ सामाजिक जिम्मेदारियाँ भी निपट जाएँ। बस जिस दिन इतनी व्यवस्था हो गयी उसी दिन छोड़ देंगे नौकरी और आजाद हो जाएंगे दस से पांच के चक्र से। फिर तो भैया सुबह उठ कर प्राणायाम, स्नान, ध्यान और मस्त नाश्ता कर (बैकग्राउंड में देसी-देसी न बोल कर वाला गाना बजते हुए) ११ बजे तक अपने सारथी के आठ इंनोवा में अपनी हाईवे वाली दुकान पर….! एक-दो घंटे कर्मचारियों से पूरा लेख जोखा लिया गया और फिर दो-चार लोग जिनको मिलने का समय दिया गया था, उनके साथ मिलना और राजनीति की चर्चा। दोपहर में सेवक घर से गर्म-२ भोजन ले आया। हल्की धूप और पेड़ की छांव में तख्त पर बैठकर भरपूर भोजन करने के उपरान्त मस्त एक घंटे की नींद ली गयी। अब तक ३ बज चुके हैं। अब पास के लोकल बाजार में अपने कार्यालय जो कि कार्यालय कम और राजनीतिक चर्चा का अड्डा ज्यादा है, पर चलने का समय हो गया।

शाम का समय कार्यालय पर गुजारने के बाद दो तीन नया चेला लोग को जो लपक कर पैर छू लिए थे, सबको आशीर्वाद देने के बाद और अगले दिन की कार्य योजना पर मुहर लगा कर कार्यालय से प्रस्थान। शाम हो गयी है। दोस्तों के साथ बैठने का तय हुआ है आज का । अपने पसंदीदा रेस्तरां में बैठना है। ६ से ८ का समय , दोस्तों का साथ, व्हिस्की के दो पेग, और ढेर सारी गप्पों के साथ अगले चुनाव की चर्चा भी….

अब तो सांसद बनना ही है। संसद भवन में बैठना है। देश के केंद्र में। वहां से देखेंगे अपने गाँव जेवार को। अब दिल्ली बैठेंगे। लोग-बाग मिलने आएँगे। हम भी कुर्ता धोती में रंग चढ़ाए सबसे मिलेंगे। इतना मिलेंगे की जब तक दिन भर में ४००-५०० लोगों से न मिल लें तब तक चैन नहीं। प्रत्येक दिन कहीं न कहीं का टूर। नए नए लोगों से मिलना। राजनीति में ४०-५० उम्र का नेता तो युवा नेता कहलाता है तो जवान तो हम वहां रहेगें ही। बाकी बाल में कलर और मुंह पर फेशियल तो हम कराते ही रहेंगे। कहीं किसी मंच या रात्रि पार्टी में आपसे नज़रें मिल गयी तो………! चेहरे पर रौनक तो होनी ही चाहिए😀 ! इसी मुलाकात में मुस्कान का आदान-प्रदान हो जाए और आंखों के इशारे से अगली मुलाकात भी तय हो जाए😜। बाकी हम इतने प्रसिद्ध तो रहेंगे ही कि आप हमारा पता ढूंढ लें😎। अब ज्यादा डिटेल में नहीं जाते हैं।

कुल मिलाकर अपने मन की ज़िन्दगी जीनी है। आजाद रहना है और लोक हित में खूब काम करना है लेकिन अपने शौक के साथ। व्यापक जिंदगी जीनी है, सीमित नहीं। तो अगला लक्ष्य संसद भवन। अब तो नया संसद भवन बन रहा है। हमारे सांसद बनने तक बन भी जाएगा 😋। जबसे नया वाला संसद भवन की तस्वीर देखें हैं, संसद जाने की इच्छा और प्रबल हो गयी है।

बाकी सांसद वाले भोकाल की चर्चा नहीं किये हैं इधर! अब हर चीज बताना जरूरी थोड़े ही है। आप लोग बहुत समझदार हैं। हमारा लालच तो भाँप ही लिए होंगे😆।

अब दिल्ली दूर नहीं।
(आपका साथ और वोट जरूरी है)

अनुनाद/संसद की ओर आनन्द/१९.१२.२०२०

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कोरोना की दवा- शादी!

पर्यायवाची और विलोम ये दो शब्द हर हिंदी के छात्र ने पढ़ा और सुना होगा। अगर कोई मुझसे पूछे कि कोरोना का विलोम क्या है तो मैं बोलूंगा कि ‘कोरोना’ का विलोम है ‘शादी’। हा हा…. आप भी सोच रहे होंगे कि क्या बात कर रहा है ये लौंडा! मतलब कि कुछ भी! नहीं भैया कुछ भी नहीं फेंक रहे हैं। बिल्कुल सही बात कर रहें हैं।

जिस तरह कोरोना ने हमारे जीवन को वीरान कर दिया था। सबसे दूर कर दिया था। नाते-रिश्ते सब खत्म कर दिए थे ! हम एक नीरस और बिना मतलब का जी रहे थे। मोह-माया त्याग कर बिल्कुल सन्यास की तरफ बढ़ चले थे और स्थिति ये आ गई थी कि हर कोई मोक्ष के मुँहाने पर ही लाइन लगाए खड़ा था कि ….. तभी चालू हो गया शादियों का सीजन! और बस यहीं कोरोना का असर खत्म! सारा डर काफ़ूर! कैसा कोरोना! काहे का कोरोना! कौन कोरोना! कहाँ का कोरोना! कोरोना मतलब? कुछ सुना-सुना सा लगता है कोरोना! अच्छा वो फलाँ चाचा वाली चाची की बहन की बेटी कोरोना! अरे नहीं वो तो करुणा है! तुम भी न! बकलोले हो बिल्कुल!

भाईसाहब ! शादियों का सीजन क्या शुरू हुआ कि बाजार गुलजार हो गए! निमंत्रण बँटने लगे! जीजा-फूफा लोगों की बाँछे खिल गयी। अब फिर रूठने का मौका मिलेगा! सालियों के मन में लड्डू फूटने लगे, अब तो जूते चुराएँगे और पैसे बनाएँगे! दूल्हा-दुल्हन तो अलग ही लेवल पर हैं, वो तो जमीन पर उतर ही नहीं रहे। बुवा, मौसी, चाची सारे रिश्ते ज़िंदा हो गए। मोह-माया जो बस प्राण छोड़ने ही वाली थी, पुनः जीवित हो उठी। और मोक्ष को प्राप्त होने वाले लोग पुनः इस मृत्युलोक के मजे लेने लगे। हा हा… बचा लिया शादी ने इस संसार को!

हे शादी! तुम भगवान विष्णु का कोई अवतार लगते हो! जो इस दुनिया को बचाने चले आए! कोई न ! देर आए दुरुस्त आए…! माहौल में गर्मी यूँ ही बनाए रखना!

और हाँ इस बार शादी का ये सीजन खत्म न हो। सबकी शादी हो जाए! अखण्ड कुँवारों की भी ! आपकी भी! क्या? आपकी हो गयी है? कोई न! घर पर पूँछकर दूसरी कर लीजिए। आखिरकार कोरोना को हराना जो है। “सबका साथ कोरोना का नाश!”

दुनिया फालतू में वैक्सीन बनाने में लगी हैं! हम आज ही एक शादी निपटाएँ हैं और कल दूसरी में जाने की तैयारी है। चलता हूँ गरम पानी में नमक डालकर….न-न गरारे नहीं करने! पीना है! पेट जो साफ करना है। आज पूड़ी खाने में कसर रह गई! कल दो पूड़ी ज्यादा खानी पड़ेगी!

अनुनाद/शादी-शुदा आनन्द/३०.११.२०२०

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रिपीट मोड!

ज़िन्दगी रिपीट मोड में चल रही है…. डेली एक ही रूटीन फॉलो हो रहा है वो भी बिना किसी इंच भर के डेविएशन के ! कैसे कुछ नया होगा? कैसे लाइफ रोमांचकारी होगी? समय रहते ही कुछ नया ऐड करना होगा और कुछ पुराना डिलीट करने होगा । वरना……… जीवन तो चल ही रह है! एक दिन कट/काट ही जायेगा😜।

उम्मीद है आपकी बेहतर चल रही होगी … बिल्कुल रोमांचक! 😎 अगर नहीं तो … यही समय है परिवर्तन का🤗।

सोचिये……..!

कुछ नया ऐड करने की सलाह भी दे दीजिएगा….🙏 घनिष्ठ मित्र साथ बैठकर देंगे तो अच्छा लगेगा। हमारी बालकनी भी तैयार है😉।

©अनुनाद/चिन्तक आनन्द/२३.११.२०२०

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लॉन्ग ड्राइव

लॉन्ग ड्राइव भी एक बेमिसाल चीज है। लॉन्ग ड्राइव का नाम पढ़कर कपल्स के चेहरों पर खुराफात वाली मुस्कान आ गयी होगी 😁 खैर . . . . . . ! सामान्यतः किसी का साथ हो सफर में और ये साथ आपके पसन्दीदा व्यक्ति का हो तो सफर का मजा बढ़ जाता है। लॉन्ग ड्राइव के साथ भी ये वाला नियम लागू होता है। मगर मेरे केस में ऐसा नहीं है। मुझे अकेले ही पसंद है लॉन्ग ड्राइव करना। कारण. . . . . .? बस यही जानने के लिए आज के लेख में चर्चा की जाएगी। वैसे सफर से सम्बंधित हर लॉन्ग ड्राइव, लॉन्ग ड्राइव नहीं होती। लॉन्ग ड्राइव बिना मकसद की होने वाली ड्राइव होती है, जो या तो खुद की खोज के लिए होती है या किसी दूसरे के अंदर कुछ खोजने को ! अब लोग दूसरों में क्या खोजते हैं ये आप लोग कमेंट में बताइएगा 😉

मेरे लिए लॉन्ग ड्राइव एकान्त प्रदान करने वाली व्यवस्था है जिसे मैं बाइस की उम्र से लगातार खोजता रहता हूँ। एकान्त के इस समय में हर उस चीज के बारे में सोचता हूँ जो करना चाहता था और कर नहीं पाया। न न न न न प्यार मोहब्बत पर मत जाइएगा, वो तो मैं आज भी कर रहा हूँ और करता रहूँगा 😍 अब विचार में क्या चीजें आएँगी, ये रस्ते में मिलने वाले दृश्यों पर निर्भर करती हैं। जैसे बाइक सवार कपल्स को आपस में डाटा ट्रांसफर करते हुए देखना 😝 एक पल को ३१ वर्ष का व्यक्ति भी पुनः २१ का होना चाहता है 😎 ३१ वर्ष का आदमी ये सब नही कर सकता । इसके लिए २१ वर्ष वाला खालीपन और जिम्मेदारी का अभाव होना चाहिए। ३१ का आदमी खाली हो भी जाये तो समाज और परिवार की गालियाँ खाली नहीं रहने देंगी। खैर . . . . . . .   इसी तरह मैं एक उपन्यास लिखने की प्लानिंग, हिंदी/संस्कृत में डॉक्ट्रेट करना, अपना पोएट्री कैफ़े खोलना जैसी कई ख्याल बुनता हूँ। अगर ये सब न हो पाए तो कम से कम पहाड़ों पर जाकर अंडे और मैगी का ठेला जरूर लगाना चाहूँगा। अगर मैं इंजीनियर न होता तो ऑमलेट बनाने वाला होता। आखिर में कुछ न कर पाया तो ट्रैवेल ब्लॉगर बन जाऊँगा। इसके लिए एक खादी का झोला, एक मोटा चश्मा, एक मस्त मँहगा DSLR , एक बढ़िया स्पोर्ट शूज, दो-चार इटैलियन हैंड मेड डायरी और जेब में २-४ हज़ार रुपये। बस बिना बताये घर से गायब…… कुछ सालों बाद लौटेंगे नाम कमाकर! एक फेमस ब्लॉगर बनके 😇

सपने बुनने के साथ-२ लॉन्ग ड्राइव में आपको फ़्लैश बैक में जाने को मिलता है। पीछे जाकर अपने आपको देखना और फिर खुद को चूतिया बोलने का भी अलग सुख है। ज़माने के सामने खुद को चूतिया बोलने में थोड़ी शर्म आती है। अब चूतिया भी पूरी दम से बोलते हैं और इसके साथ डी के बोस भी। इतना खो जाते हैं कि अभी पीछे वाले खुद को इतनी तेज चट्ठा मारेंगे और वो गलती करने से रोक लेंगे जिसकी वजह से आज परेशान हैं। इतने चूतिया कैसे हो सकते थे हम ! फिर क्या . . . . . ! मन मसोस कर रह जाते हैं ! क्या करें खुद से प्यार भी है तो माफ़ भी कर देते हैं खुद को। इस पूरे समय में हम चिल्ला-२ कर खुद से बात कर रहे होते हैं। कोई साधारण व्यक्ति देख ले तो आगरा छोड़ आये। खैर . . . . . इस दौरान गाड़ी ऑटो पायलट पर रहती है और हमें कुछ आभास नहीं। ईश्वर ने शरीर को गज़ब बनाया है। हमारे शरीर को दिल और दिमाग दोनों पर ही भरोसा नहीं होता। इसलिए कुछ काम वो इन दोनों को बाईपास कर खुद कर लेता है, जैसे ये ड्राइविंग !

इस बीच रास्ते में घने बादल दिखाई दे जाएँ और बारिश हो जाये तो अमोल पालेकर बनते देर नहीं लगता ! महीन सी मुस्कराहट आपके चेहरे पर और रोमांस के कीड़े कुलबुलाने लगते हैं……  कुछ पल को पहाड़ों की पिछली यात्रा याद आ जाती है ! साथ में तुम और याद आ जाते हो! इसी बीच हम “गोरी तेरा गाँव बड़ा प्यारा . . . . . . ” वाला गाना गाने ही वाले होते हैं कि साला अगले पल ही बारिश बंद और चमकदार धूप ! अरमान जागने से पहले ही पानी फिर जाता है। लॉन्ग ड्राइव में ये दिक्कत बहुत होती है ! तब तो और ज्यादा जब आप उत्तर प्रदेश में ड्राइव कर रहे हों। 

औरतें. . . . .  सॉरी! लड़कियाँ . . . . . , हाँ ! लड़कियाँ लॉन्ग ड्राइव में क्या सोचती हैं, इसकी मुझे ज्यादा खबर नहीं ! शायद मेक अप के बारे में या फिर अगली पार्टी में क्या पहनना है! बाकी और चीजों के बारे में सोचने के लिए लड़के तो हैं ही! वो सोचेंगे ही! हैम क्यूँ सोचे! (अगर आप मेरे विचार से सहमति नहीं रखती हैं तो आप अपवाद हैं और यूनिक हैं। हमारी खूब जमेगी।) 

ख़ैर. . . . . तुम तो हमारे बारे में ही सोचती होगी 💝।

ऊपर की चर्चा के अलावा मैं एक और चीज जो सोचता हूँ वो है पैसा! ढेर सारा पैसा। इतना कि बस लुटाता जाऊँ। दोस्तों में, परिवार में, समाज में, हर किसी ऐरे-गैरे चलते-फिरते लोगों में। आदमी की इज्जत ही तब है जब वो सब पर पैसा लुटाये। सूरत और सीरत से कुछ नहीं होता। आदमी को गर्व भी होता है पैसे को अपनों या गैरों के बीच खर्च करके। एक आत्म सुख मिलता है। बिलकुल वैसा सुख जैसा तथागत बुद्ध को ज्ञान प्राप्त होने के बाद मिला होगा। शायद ! कार से चलो और चौराहे पर कोई आपसे हाथ फैलाकर माँगे और आप उसे आगे बढ़ने का इशारा कर दें, मुझे ये नहीं अच्छा लगता। गरीबों वाली फीलिंग आती है। जब तक उस गरीब को २-४ हज़ार दे न दो तब तक कोई बात? धिक्कार आदमी होने पर! इस लॉन्ग ड्राइव के दौरान हम पूरी दुनिया की गरीबी दूर कर चुके होते हैं 😜

अब पैसे कमाने के लिए कोई बिज़नेस आईडिया भी चाहिए। बदलते दौर के साथ एक नया आईडिया। ऐसा आईडिया जो आपको रातों रात अमीर नहीं बहुत अमीर बना दें। बिलकुल कठोर निर्णय, अब तो कर ही देंगे ये आईडिया इम्प्लीमेंट। लेकिन लॉन्ग ड्राइव ख़त्म होते-२ ही दिल हल्का होने लगता है की अगर फेल हो गए तो ? न न न न न न . . . . .  रिस्क है ! बहुत रिस्क है।

फिर सोचते हैं कि कोई न ! करते हैं ! देखेंगे ! फेल हो गए तो भी ऑप्शन तो है न! पहाड़ों पर अंडे और मैगी का ठेला लगाने का! तुम तो घूमने आओगे न वहाँ! मैगी खाने हमारी दुकान पर! हम अपने हाथ से बनाकर ऑमलेट भी खिलाएँगे 💖 तुम खाना  . . . . . और हम तुम्हे ताकेंगे ! बेशर्मों की तरह ! 

ख़ैर  . . . . ! प्यार में सब जायज है। ताकना भी ! ऐसा सोचना भी !

और हाँ. . . .  लॉन्ग ड्राइव में कोई टोकने वाला भी नहीं 😁

©अनुनाद /आनन्द कनौजिया /२९.१०.२०२० 

फोटू साभार इंटरनेट।