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ढलती शाम …

ये सूरज सुर्ख लाल है बिल्कुल मेरी तरह लगता है,
इस ढलती शाम से बेहद नाराज लगता है।

©अनुनाद/आनन्द कनौजिया/०९.११.२०२०

Posted in CHAUPAAL (DIL SE DIL TAK)

टोल नाका

तुम मेरी जिंदगी के सफर में हाइवे का टोल नाका हो, जहाँ मैं पल भर को रुकता हूँ और टोल की फॉर्मेलिटी जैसे ही निपटती है, मैं फुल एक्सेलरेटर में वहाँ से निकलता हूँ और पीछे मुड़कर नहीं देखता, कभी भी! लेकिन जब तक जिंदगी का ये सफर है, ये हाइवे है, ये टोल भी रहेगा! उसी तरह तुम भी मिलते रहोगे! कभी साक्षात तो कभी ख़्यालों में, यादों की तरह ! इससे मैं बच नहीं सकता। लेकिन अगली बार एक्सेलरेटर और तेज लिया जाएगा………..!


©अनुनाद/आनन्द कनौजिया/०२.११.२०२०


फ़ोटो साभार इन्टरनेट।