एक तुझसे मोहब्बत की आदत क्या लगी हमें देखो…
अब तो चल-अचल हर प्राणी से मोहब्बत किये जा रहे हैं!
निहार लेते हैं रूप तेरा अब हम तो सबमें, तेरे बाद से…
बस इस तरह तुझसे अपनी मोहब्बत निभाये जा रहे हैं!
©️®️मोहब्बत/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/०६.०४.२०२१



एक तुझसे मोहब्बत की आदत क्या लगी हमें देखो…
अब तो चल-अचल हर प्राणी से मोहब्बत किये जा रहे हैं!
निहार लेते हैं रूप तेरा अब हम तो सबमें, तेरे बाद से…
बस इस तरह तुझसे अपनी मोहब्बत निभाये जा रहे हैं!
©️®️मोहब्बत/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/०६.०४.२०२१



आधी रात को खिड़की से बाहर क्या देखूँ
फिर भी देखूँ तो रात के सन्नाटे में क्या ढूढूँ
ढूढूँ भी तो वर्षों की तन्हाई में किसे पुकारूँ
पुकारूँ तो हृदय की आवाज किसे सुनाऊँ?
आवाज बहुत है भीतर शोर बहुत है मगर
रात के सन्नाटे सा चेहरा ये शान्त बहुत है
दिन के भीषण कोलाहल से बचने को रात ने
आज कल अन्धेरे से कर ली यारी बहुत है।
रात के इस सफर को पूरी रात काटनी है
दिल के इस सफर को ये ज़िन्दगी काटनी है
रात ज़िन्दगी है या फिर ज़िन्दगी ही रात सी है
अब तो बस ज़िन्दगी की ये रात काटनी है।
अब तो बस बादल घिर जाएँ और बिजली चमक जाए
एक तेज आँधी चले और इस सर का छप्पर उड़ जाए
ऐ ज़िन्दगी अब कोई ख्वाहिश नहीं मैं कुछ और नहीं माँगूँगा
बस जम कर बारिश हो और फिर चमकीली धूप खिल जाए।
©️®️अनुनाद/आनन्द कनौजिया/२५.०३.२०२१

अकेले आये थे
अकेले जाना है
ये जीवन भी हमें
अकेले ही बिताना है।
इर्द-गिर्द की भीड़ छलावा
अपना न कोई नाता है
अकेलेपन का गीत
इसीलिए तो भाता है।
खुद का साथ
खुदा का साथ
जीवन सुख में
अपना ही हाथ।
ज्ञान का अभिमान
दिखाता अज्ञान
झुककर देखा
तभी मिला सम्मान।
बन्द मत करो
चार दीवारों में
खुलकर मिलो सबसे
खुशियाँ नज़ारों में।
करते रहो बातें
जीते रहो बेमिसाल
वरना उम्र का क्या
कट जाएगा ही साल।
अकेले आये थे
अकेले ही जाना है
ये जीवन भी हमें
अकेले ही बिताना है।
©️®️अनुनाद/आनन्द कनौजिया/२०.०३.२०२१

सूनी आंखों का सपना
इनमें अब कुछ भी सूना न हो
कोरे इस दिल का
कोई कोना अब कोरा न हो
टूटा हो बिखरा हो
अब यहां सब कुछ बेसलीका हो
सुलझन का हम क्या करें
छोर सभी अब उलझे उलझे हो
एक हलचल हो धड़कन में
दिल में अब कुछ सूना न हो।
©️®️अनुनाद/आनन्द कनौजिया/१८.०२.२०२१
