Posted in Uncategorized

मासूमियत-एक हथियार!

मासूमियत मासूम न रही,
किसी हथियार से कम न रही।
होता इसका बख़ूबी इस्त्माल,
करने को क़त्ल सरे आम।
शौक़ हमने भी रखा,
हथियारों के ज़ख़ीरे का,
डिस्प्ले में नित बढ़ता रहा,
हथियार नए क़रीने का।
आज यूँ ही ख्याल आया,
सुना बाज़ार में नया हथियार आया।
चलो हथियारों के दुकान पर चला जाय,
चलो वो वाला नया हथियार लाया जाय।
ज्यूँ ही हमने दुकान पर क़दम रखा,
दुकान वाले ने एक तगड़ा सलाम ठोंका।
कुछ पूँछता उससे पहले मेरी नज़र उस पर पड़ी
सबसे महँगे हथियरों में मासूमियत ही मिली।

Posted in Uncategorized

चेहरे….

चेहरों के इस संसार में बस एक चेहरा ढूढ़ता हूँ,
चेहरे पर न हो कोई और चेहरा, वो चेहरा ढूंढता हूँ।

चेहरों के इस बाज़ार में चेहरे सभी रंग बिरंगे हैं,
रंग बिरंगे इन चेहरों में मैं एक रंग पक्का ढूढ़ता हूँ।

तासीर मेरी पानी सी मैं रूप बड़ा बेजोड़ रखता हूँ,
ढल जाता हर रूप में, मैं रुख लचीला बहुत रखता हूँ।

वो कहते हैं कि आनन्द तू चेहरे पर मुस्कान बहुत रखता है,
क्या बताऊँ कि मैं दर्द को दवा में बदलने का हुनर खूब रखता हूँ।

Posted in Uncategorized

क्या खोया-क्या पाया!

इतनी भाग दौड़ के बाद बस यही नतीजा निकला,
न कभी फ़ुर्सत मिली और न ही कोई काम निकला !

ज़िंदगी तुझे तो हम कभी समझ ही न सके,
उलझनों को सुलझाते रहे पर न कोई हल निकला !

जब भी हमको लगा तुझे पहचानने लगे हम,
जब जब पर्दा उठा तब तब चेहरा नया निकला !

आरज़ू थी कि एक शाम होगी और तेरा साथ होगा,
इंतज़ार में हो गयी रात न जाने कब ये दिन निकला !

ये तो कुछ शब्द हैं जो निभा रहे हैं तेरा साथ,
वरना दुनिया की इस भीड़ में आनंद तू तो बेहद अकेला निकला !

Posted in Uncategorized

क्या फायदा!

अब गुस्सा करना छोड़ दिया मैने……
किस बात से फर्क पड़ता है, ये बताने से क्या फायदा!

अब कोशिशें नहीं करता मैं……
जो अपना नही है, उसे समझाने से क्या फायदा!

तीर तो कई हैं तरकश में मेरे…..
जब हारना अपनों से है, तो चलाकर क्या फायदा!

मेरी खामोशी को मेरी कमज़ोरी समझते हैं…..
खो चुके है वो मुझको, अब उन्हें बताकर भी क्या फायदा!

ये रात यूँ ही बेलज्जत बीत रही है……
उनके आने की कोई खबर नही, इंतज़ार का क्या फायदा!

जिंदगी गुजर रही है न जाने किस नशे में……
किधर जाना नही है पता, अब होश में आने का क्या फायदा!