इधर देखना उधर देखना ये निगाहें खूब दौड़ने लगी
चमक उठा ये चेहरा और महक उठी पूरी ये शाम
लगा कि अपना आना भी सफल हो गया इस महफ़िल में
जब किसी ने लिया इत्र सा महकता हुआ तेरा नाम।
Month: July 2019
इससे पहले कि…
इससे पहले कि
ये घड़ी बीत जाए
दिल की बात
दिल में रह जाए
भर नज़र देख लूँ
दिल के पटल पर
तस्वीर उतार लूँ
बड़ी मुश्किल हैं
धड़कनें तेज़ बहुत हैं
कैसे भरूँ रंग
काँपते हाथ मेरे
विचलित ये मन
हो रहा अधीर
बहुत ये चितवन
खो रहा होश
थाम लो मुझे
इससे पहले कि……….
रात के आंसू…
रात के आंसू
तो तकिए जनते हैं ।
हम रोए कितना
ये अंधेरे जानते हैं।
चेहरे के शिकन को छुपाया कैसे
ये मेरे घर के कोने जानते हैं।
तुम्हारे जाने का दुःख
झेल गए सब कुछ
मत पूछो हम ज़िंदा हैं कैसे
दिल की बातें हैं बस,
दिल की ये धड़कन जानते हैं।
किस रिश्ते में बाँधू तुमको!
तुझसे दूर लेकिन बेहद क़रीब तुमसे,
मुश्किल हो रहा ये रिश्ता निभना हमसे,
तुम क्या लगते मेरे ज़माना पूँछें मुझसे,
नही सूझता कि लोगों को समझाऊँ कैसे।
ये संगत पुरानी, पसंद तेरे तरीक़े हमको,
रहना संग मेरा तेरे नहीं पसंद किसी को,
रिश्तों को नाम देना ज़रूरी है क्या, कोई बताए हमको,
नही समझ पा रहा किस रिश्ते में बाँधू तुमको ।
सोचते तो हैं मगर…
सोचते तो हैं मगर
मगर मेरे बस में नहीं
नहीं कर सकते हम
हम ख़यालों में बुनते
बुनते चाँद सितारे
सितारों का आँचल
आँचल में चेहरा
चेहरा ऐसा कि परे कल्पना
कल्पना में क्या जीना
जीना क्या तेरा बिना
बिना तेरे अब कुछ और नही सोचना
सोचते तो हैं मगर!
