Posted in POETRY

रेडियो एक्टिव !

तुम्हारे तन पर साड़ी
लिपटी हो जैसे नागिन,
अदाओं ने तुम्हारी ओढ़कर इसे
जहरीला और कर दिया।

साड़ी पहनना चाहते सभी पर
जन्मी है ये केवल तुम्हारे लिए,
हुनर और सलीके ने तुम्हारे आज
इस अधूरी को पूरा कर दिया।

देखो न आया करो सामने इस कलेवर में
हम अपनी जान की आज दुआ मांगते हैं,
रेडियो एक्टिव आप पहले ही क्या कम थीं
जो आज रेडिएशन का लेवल इतना अधिक कर दिया।

हम तो बस यही सोचकर परेशान हैं
दिल के मरीजों का हाल अब क्या होगा,
न्यूक्लियर हथियारों पर तो रोक-टोक है
पर आपको रोकने का इंतजाम क्या होगा।

Author:

Writer, cook, blogger, and photographer...... yesssss okkkkkk I am an Engineer too :)👨‍🎓 M.tech in machine and drives. 🖥 I love machines, they run the world. Specialist in linear induction machine. Alumni of IIT BHU, Varanasi. I love Varanasi. Kashi nahi to main bhi nahi. Published two poetry book - Darpan and Hamsafar. 📚 Part of thre anthologies- Axile of thoughts, Aath dham assi and Endless shore. 📖 Pursuing MA Hindi (literature). ✍️ Living in lucknow. Native of Ayodhya. anunaadak.com, anandkanaujiya.blogspot.com

2 thoughts on “रेडियो एक्टिव !

  1. वाह। क्या खूब लिखा है।किन पंक्तियों की तारीफ करें। लाजवाब।
    हम तो बस यही सोचकर परेशान हैं
    दिल के मरीजों का हाल अब क्या होगा,
    न्यूक्लियर हथियारों पर तो रोक-टोक है
    पर आपको रोकने का इंतजाम क्या होगा।

Leave a Reply