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नज़र

किसी खास ने कुछ खास ही देखा,
नज़रों में भरकर बेहिसाब भी देखा,
नज़र पारखी ने तोल-मोल कर देखा,
साधारण से व्यक्ति को असाधारण देखा।

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@अनुनाद/आनन्द कनौजिया/१०.१२.२०२०