Posted in SHORT STORY

अधूरी कहानी!

दारू की टेबल पर
जब कोई
तेरी मोहब्बत में
पूरी तरह हारकर
तुझे गालियाँ देता है,
बुरा-भला कहता है…
तो मैं बस सुनता हूँ
कुछ भी नहीं बोलता
और चुपचाप
अपने मन में
कुछ सोचकर
सर झुकाकर
हल्के से
मुस्कुरा देता हूँ….
शायद तुम्हें
मुझसे बेहतर
कोई समझ ही
नहीं पाया….!
और ये तुम्हारी
बदनसीबी है कि
तुम मुझे
नहीं समझ पाए…..!

और इस तरह
हमारी कहानी
अधूरी रह गई…….

©️®️अधूरी कहानी/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/१०.०७.२०२१

Posted in Uncategorized

साथ !

मैं तुम्हारे साथ हूँ,
बोलने से सिर्फ
साथ नहीं होता।
साथ होता है
साथ बैठने से
घंटो, बेवजह!
इतना कि
किसी भी विषय पर
दोनों की
अलग-२ राय
मिलकर एक हो जाय।

और फिर
दोनों को
दोनों की
चिंता करने की
“कोशिश”
न करनी पड़े।
बोलने की
जरूरत न पड़े।
कोई फॉर्मेलिटी
या संकोच न रहे।
सही मायने में
साथ होता है
साथ बैठने से!

©️®️साथ/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/०४.०७.२०२१

Posted in CHAUPAAL (DIL SE DIL TAK)

आदत नहीं गई…!

माना कि तुझको पा लिया है हमने मगर,
महफ़िल में तुझे ढूढने की आदत नहीं गई।

सोचा था कि देखने से ही प्यास बुझेगी मगर,
कुछ देर साथ बिताने से भी बेचैनियाँ नहीं गई।

क्या गज़ब का मिराज है तू और तेरा हुस्न,
तेरे बहुत पास पहुँचने से भी ये दूरियाँ नहीं गई।

तेरे साथ की ठंडक के बारे में बहुत सुना है मगर,
दिल में लगी है जो अगन तेरे छूने से भी न गई।

लोग कहते हैं कि मुझको अल्लाह की इबादत कर,
मेरे लबों को सुबह-शाम तेरा नाम लेने की आदत न गई।

हुस्नो की बारात है देखो मेरे चारों तरफ मगर,
दुल्हन से तेरे चेहरे से मेरी नज़र कहीं और न गई।

माना कि तुझको पा लिया है हमने मगर,
महफ़िल में आनन्द तुझे ढूढने की आदत नहीं गई।

©®आदत नहीं गई/अनुनाद/आनन्द कनौजिया/०१.०७.२०२१