Posted in CHAUPAAL (DIL SE DIL TAK)

रात आती क्यों है?

एक शाम की उम्मीद है अब मिलती नहीं क्यों है?
ये रात कमबख़्त तेरे बिना चली आती क्यों है?

बीतती शाम और आती रात से होती अब घबराहट क्यों है?
ये चाँद, सितारों और ठंडी हवा से होती शिकायत क्यों है?

अब तो छुट्टियों से डर लगता है न जाने ये मसला क्यों है?
बाहर का शोर तो ठीक लेकिन खामोशी से डर लगता क्यों है?

ये खाली सड़क, ये रोड लाइट ये सब खामोश क्यों हैं?
अकेले खड़ा मैं इधर, अगल-बगल में तू नही क्यों है?

बैठा हूँ बालकनी में शान्त मगर मन मेरा बेचैन क्यों है?
सब कुछ तो है पाया मैंने पर लगे कुछ खोया क्यों है?

खूबसूरत इन गमलों में फूल लगते इतने साधारण क्यों हैं?
खुशबुओं में इनकी मन मेरा तलाशता तेरा चेहरा क्यों है?

समय काटने को व्हिस्की है मगर इसमें न नशा क्यों है?
खत्म बोतल है पर अब न कोई हो रहा असर क्यों है?

दोस्त हों, दौर चले और बातें खूब हों मन ऐसा चाहता क्यों है?
उन बातों के दौर में जिक्र तेरा हो केवल, दिल चाहता क्यों है?

©️अनुनाद/आनन्द कनौजिया/१०.१०.२०२०

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हम बिजली अभियन्ता…..

नौकरी करने चले थे हम सरकारी,
क्या बताएँ बस मति गयी थी मारी।

बिजली अभियन्ता हैं बिजली हम बनाते हैं,
दूर-२ तक पहुँचाते और इसे घर-२ बाँटते हैं।

हवा पानी की तरह ही भाई बिजली भी ज़रूरी है,
है मँहगी मगर सबको सस्ती मिलनी ज़रूरी है।

आवश्यक चीज़ों-सेवाओं का कभी सौदा नही किया जा सकता,
प्रगति को ज़रूरी बिजली को लाभ के लिए बेचा नहीं जा सकता।

बिजली घर-२ की ज़रूरत है, इस हक़ को छीना नहीं जा सकता,
केवल मुनाफ़ा कमाने का इसको साधन बनाया नहीं जा सकता।

जब तक भारत देश से हमारे देखो ग़रीबी नहीं मिटती,
सरकारी सहयोग से ही सबको सस्ती बिजली मिल सकती।

व्यापारी तो केवल व्यापार करने आएँगे
बिना मुनाफ़े के वो क्या ही बिजली बेच पाएँगे।

जब बिजली बन जाएगी मुनाफ़े का सौदा तो सोचिए
क्या किसी गरीब के घर कभी रोशनी हो पाएगी ?

ये बिजली है आम जन मानस का हक़ और सबको ज़रूरी है,
बिना किसी लाभ-हानि के इस पर सरकारी नियंत्रण ज़रूरी है।

माना की कमियाँ हैं अभी कुछ हम सेवा प्रदाताओं में,
तकनीक के प्रयोग से किया जा सकता है सुधार इसमें।

हम बिजली अभियंताओं ने देश हित को क़सम ये खायी है,
करने को देश सेवा हमने न जाने कितनी नौकरियाँ ठुकरायीं हैं।

है योग्यता हममे, हम आज भी अपना हित साध सकते हैं,
हम किसी कोरपोरेट या फिर देश के बाहर भी जा सकते हैं।

मगर देश भक्ति का जज़्बा लिए हम सरकारी सेवाओं में आयें हैं
समाज की भलाई को लेकर हम सब संघर्षों को गले लगाएँ हैं।

निजीकरण बर्दाश्त नहीं ये हमारे और गरीब जनता के साथ धोखा है,
देश की प्रगति में साधक बिजली को हमने ही ग़लत हाथों में जाने से रोका है।

©️~अनुनाद/आनन्द कनौजिया/१७.०९.२०२०

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अफ़सोस

पता नहीं क्यूँ मुझे मँहगा खाना खाने का हमेशा अफसोस हुआ😞 २-३ लोगों के खाने पर किसी रेस्टॉरेन्ट में २-३ हजार स्वाहा कर देना हमेशा बुरा लगा🤢 भारत जैसे देश में २-३ हजार में एक औसत परिवार का महीने भर का राशन आ सकता है🤔 महँगे कपड़े पहन लो😎, मँहगी गाड़ी खरीद लो😍, मँहगी दारू पी लो🤗, मँहगा घर ले लो🤑 लेकिन मँहगा खाना हमेशा अपराध लगता है मुझे। कपड़े साल में कितने लेंगे आप (बहुत रईस हैं तो बात अलग है)? गाड़ी भी एक बार ले लिया तो ८-१० साल फुरसत ! दारू भी पारिवारिक आदमी/औरत कितना ही पियेगा। पर खाना तो रोज खाया जाता है। और प्रत्येक व्यक्ति की बिल्कुल बेसिक जरूरत है खाना, जो सबको मिलना ही चाहिए। दिखावे में मँहगा खा लिए, खिला दिए पर दिल में एक अफसोस हमेशा रहा। शायद ये अफसोस हमेशा रहेगा, जब तक भारत में भूख से मौतें होती रहेंगी। जब तक बच्चे कुपोषण का शिकार होते रहेंगें।

बहुत कर लिए नौकरी के शुरुआती दिनों में खाने पर पैसा बर्बाद। अब नहीं करेंगें। ये मितव्ययिता खुद भी सीखना है और बच्चों में भी इनकोड करना है। नीलिमा जी तो चावल का एक दाना भी नही बेकार जाने देती हैं। घर का बना भोजन ही प्रसाद रूप में ग्रहण करेंगे। सौगंध ले लिए हैं……! हॉबी वाली लिस्ट में कुकिंग लिख लिए हैं और यूट्यूब पर कुकिंग क्लास भी ले रहे हैं। खुद बनाएँगे और नीलिमा जी को भी खिलाएँगे 😆। आखिर सौगंध जो लिए हैं। अब सौगंध हम लिए हैं तो उन्हें किचन में क्यों धकेले। इतने भी खुदगर्ज नहीं हम 😋

~अनुनाद/आनन्द कनौजिया/१७.०८.२०२०

फोटू: साभार – इण्टरनेट

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अलविदा_धोनी ……!

आपके इसी अंदाज के तो कायल हैं हम सब…. बिल्कुल अचानक और अलग निर्णय लेना और उसे सही साबित कर देना। आपने कभी किसी के बारे में नही सोचा कि लोग क्या सोचेंगे, क्या बाते बनाएँगे! आपने बहुत सारी यादें दी जिनमे कुछ विशेष हमेशा याद रहेंगी, जैसे-

*आपका हेलीकाप्टर शॉट याद रहेगा।
*मैदान पर बैटिंग के लिए आने की स्टाइल याद रहेगी।
*छक्के याद आएंगे।
*हेयर स्टाइल याद रहेगा।
*दिल में जो हारने का डर होता था उसे आपने ही खत्म किया।
*डीआरएस सिस्टम को धोनी रिव्यु सिस्टम कर देना याद रहेगा।
*बिना विकेटों को देखे थ्रो मारना तो कोई आपसे सीखे।
*क्रिकेट में आपने अपनी जो छाप छोड़ी उसने क्रिकेट की परिभाषा बदल दी। आप एक अध्याय नही पूरा उपन्यास हो।
*क्रिकेट माइंड गेम है, भारतीय परिदृश्य में ये आपने सत्यापित किया।
*सचिन, दादा और द्रविड़ की विदाई पर दुःख हुआ था पर आपके सन्यास लेने का दुःख नही हुआ। सचिन, दादा, द्रविड़ जैसे खिलाड़ी नहीं मिलेंगें, हमें इसका दुख था। पर आपने तो अपनी कप्तानी में किसी भी खिलाड़ी से मैच जिता दिया इससे जो भरोसा पैदा हुआ उससे दिल सदा मजबूत रहेगा। आपसे नए खिलाडी बहुत कुछ सीखेंगे।
*आपकी हाज़िर जवाबी भी याद आएगी।

छोटे शहर से इतना बड़ा क्रिकेटिंग ब्रेन निकलेगा और दुनिया पर छा जाएगा, पहले कभी किसी ने नही सोचा होगा। छोटे शहर के खिलाड़ियों के लिए तो आपने जो रोशनी दिखाई है वो लाजवाब है !

किसी रिटायरमेंट गेम का लालच नहीं। कोई बड़ा विदाई समारोह नहीं। चुपचाप आये और धमाके किए और चुपचाप चल दिये। मजा आ गया इस स्टाइल में।

छा गए आप ! आज़ाद ख्यालों वाले कप्तान ने आजादी का दिन चुना रिटायर होने के लिए। मजा आ गया।

अलविदा कैप्टेन कूल …….! अलविदा!

ईश्वर आपको सदैव स्वस्थ रखे और बिजली की गति नवाजे 😁
बांग्लादेशी खिलाड़ी की विकेट कीपिंग वाला रन आउट याद रहेगा।

~अनुनाद/आनन्द कनौजिया/१५.०८.२०२०

Retirement video of Dhoni