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दिन कहाँ अपने

आज के दौर में
दिन कहाँ अपने
अपनी तो बस
अब रात होती है।

बस व्यस्त काम में
खोए हैं सारे जज़्बात
इस सब में दिल की
कहाँ बात होती है।

कभी गलती से ख़ाली
जो मिल जाएँ कुछ पल
इन ख़ाली पलों में भी बस
काम की बात होती है।

आगे बढ़ने की दौड़ में
ठहरना भूल गए हम
मिलना-जुलना खाना-पीना
अब कहाँ ऐसी शाम होती है।

कुछ रिश्ते थे अपने
कुछ दोस्त सुकून के
घण्टों ख़ाली संग बैठने को अब
ऐसी बेकार कहाँ बात होती है।

आज के दौर में
दिन कहाँ अपने
अपनी तो बस
अब रात होती है।

©️®️दिन कहाँ अपने/अनुनाद/आनन्द/१२.०८.२०२२

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ऐसा तो कभी हुवा नहीं

ऐसा तो कभी हुवा ही नहीं
लोग मिलने आए और हमने उन्हें देखा ही नहीं
तुम जो आए किस तरह सामने
महसूस किया हमने मगर नज़रें उठी ही नहीं!

दिल ने चाहा कि देख लें
कोशिश भी की मगर खुद पर ज़ोर चला ही नहीं!
गलती से जो नज़र टकरा गई
दिल की धड़कनों फिर पर चला कोई ज़ोर नहीं!

तुम्हारी वो मद्धम सी मुस्कान
मेरी चोर नज़रों से फिर तो रहा गया ही नहीं!
भरपूर तुम्हें देख लेने की चाहत
क्या बताऊँ ऐसी कोई चाहत पहले कभी हुई ही नहीं।

बेक़ाबू उस पल में हमने
तुम्हें रोकने के बहाने ढूँढे पर कुछ मिला ही नहीं
पल भर में इतना कुछ घट गया
दिल को सम्भालूँ या दिमाग़ कुछ सूझा ही नहीं!

देखो तुम संभालो अपना आकर्षण
लोगों को इतने अधिक गुरुत्वाकर्षण की आदत नहीं!
लड़खड़ाना बहुत मुमकिन है उसका
इतने सधे कदमों से चलना किसी ने सीखा नहीं!

गुस्ताखी जो कोई कर दे
उसे माफ़ कर देना और तुम कुछ कहना नहीं!
तुम और तुम्हारा चुम्बकीय प्रभाव
इस प्रभाव से बचने का किसी के पास तरीका नहीं!

तुम तो चले गए मगर
शेष जो छोड़ गए वो असर कम होता ही नहीं!
तूफ़ान तो थम गया मगर
जो बिखरा वो समेटने से भी सिमटता नहीं!

ऐसा तो कभी हुवा ही नहीं
लोग मिलने आए और हमने उन्हें देखा ही नहीं
तुम जो आए किस तरह सामने
महसूस किया हमने मगर नज़रें उठी ही नहीं!

©️®️ऐसा तो कभी/अनुनाद/आनन्द/२१.०७.२०२२

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जादू-टोना

कौन कहता है ये जादू-टोने नहीं होते
ग़ज़ब अजूबों के अजब तजुर्बे नहीं होते
सब कुछ सीखा यहाँ हमने हंसते-रोते
और फिर देखो ये जादू नहीं तो और क्या
एक चेहरे को देखा और सब कुछ हम भूल गए……

बचपन से थे अच्छे से पढ़ते-लिखते
लोग बाग़ तारीफ़ करते नहीं थकते
सारे समीकरण ज़ुबान पर थे बने रहते
चेहरे पर उनकी ज़ुल्फ़ों से जो लिखी इबारतें
इक बार जो पढ़ी तो सारे किताबी समीकरण भूल गए…..

गुणा-गणित में हम मिनट नहीं लगाते
जोड़-घटाने में हम सबको पीछे रखते
चलता-फिरता बही-खाता सबका हिसाब रखते
होठों की हल्की मुस्कान और उनके पीछे चमकीले दाँत
और फिर उनकी चकाचौंध में हम सारी दुनियादारी भूल गए…..

बेहतरीन चीजों का हम शौक़ थे रखते
पसंद की चीजों को संजोकर थे रखते
अपनी हर चीज को दिल से लगा कर रखते
बस उनके जीवन में आ भर जाने से देखो
एक उनको अपनाकर हम सब कुछ अपना भूल गए….

कौन कहता है ये जादू-टोने नहीं होते
ग़ज़ब अजूबों के अजब तजुर्बे नहीं होते
सब कुछ सीखा यहाँ हमने हंसते-रोते
और फिर देखो ये जादू नहीं तो और क्या
एक चेहरे को देखा और सब कुछ हम भूल गए……

©️®️जादू/अनुनाद/आनन्द/२२.०६.२०२२

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भूल गए!

दिन, तिथि, जगह, शाम, सब मुक़र्रर थी मिलने की,
पलों के साथ में उम्र भर के साथ का वादा लेना भूल गए।

मिलने से ज़्यादा ख़ुशी तो हमें उनके मिलने के वादे से थी,
इतनी ख़ुशी में हम दिल की बात कहना ही भूल गए।

उनके आते ही न जाने दिमाग़ ने ये कैसी हरकत की,
मिलन के पलों को गिनने में हम उन्हें जीना भूल गए।

सामने वो और उनकी कशिश से भरी मद्धम मुस्कान थी,
उनकी मद भरी आँखों में हम बस सारी तैराकी भूल गए।

इतने सलीके से बैठे हैं सामने जैसे सफ़ेद मूरत मोम की,
इधर हम हाथ-पैर-आँखो को सम्भालने का तरीक़ा भूल गए।

गला ऐसा फिसला कि बोले भी और कोई आवाज़ न की,
धड़कनों के शोर में अपनी ही आवाज़ को सुनना भूल गए।

दिन, तिथि, जगह, शाम, सब मुक़र्रर थी मिलने की,
इतनी ख़ुशी में हम दिल की बात कहना ही भूल गए….
पलों के साथ में उम्र भर के साथ का वादा लेना भूल गए।

©️®️भूल गए/अनुनाद/आनन्द/२६.०५.२०२२

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ख़ूबसूरती

“ख़ूबसूरत लोग अगर अनजान हों तो अधिक ख़ूबसूरत और आकर्षक हो जाते हैं!”
😇
😍
😎

कुल मिलाकर ख़ूबसूरती एक वैचारिक fantacy के सिवा कुछ भी नहीं! यह fantacy एक व्यक्ति विशेष के जीवन भर की कल्पनाओं का समूह भर है जिसे वो किसी अनजान और ख़ूबसूरत व्यक्ति को देखकर एक पल विशेष में अनुभव कर लेता है। इन कल्पनाओं और उस देखे गए ख़ूबसूरत व्यक्ति में कोई रिश्ता नहीं होता। ये देखने वाले व्यक्ति के अंदर चल रही काल्पनिक कहानी मात्र होती है। ऐसी स्थिति में देखने वाले व्यक्ति को देखे गए व्यक्ति को लेकर कोई भी निर्णय लेने से बचना चाहिए।

ख़ूबसूरती एक मृग तृष्णा है। वास्तविकता में इसका कोई स्वरूप नहीं। सब कुछ आपके दिमाग़ के भीतर है। वहीं से आप इसे महसूस कर सकते हैं। तो अगली बार आपको ख़ूबसूरती का एहसास लेना हो तो इसे दूसरों में न ढूँढे। बस अपने दिमाग़ को इस हिसाब से अभ्यस्त करिए कि वो जब चाहे स्वयं इस ख़ूबसूरती का रसास्वादन कर ले। इस तरह आपको दूसरों से मिलने वाली निराशा से भी दो-चार नहीं होना पड़ेगा।

ऊपर वाले पैराग्राफ़ को देखकर कुछ ख़ुराफ़ाती लोग कई स्तर तक के मतलब निकाल सकते हैं🤣😆 और हास-परिहास कर सकते हैं! बस इन्हीं लोगों की वजह से मेरे लिखने की सार्थकता बढ़ जाती है 😉

यह सब लिखते वक्त मैंने बहुत सारा दिमाग़ लगाया है! ये पढ़ने में अच्छा लग सकता है मगर असल में ऐसा हो ही नहीं सकता क्यूँकि दुनिया दिल से चलती है! बिना चूतियापे के कोई कहानी बन ही नहीं सकती😋 और बिना कहानी के तो क्या ही मज़ा है जीने में 😁

इसलिए इस संसार की गति बनाए रखने के लिए मूर्खों की ज़रूरत ज़्यादा है……

मैंने भी खूब मूर्खता की है और सफ़र अभी जारी है….

खोज अभी जारी है……..

एक नयी मूर्खता करने की !

इसमें आपका साथ मिल जाएगा तो मज़ा दो गुने से चार गुने तक होने की सम्भावना है 🙃

©️®️ख़ूबसूरती/अनुनाद/आनन्द/११.०५.२०२२