प्यार हो तो देखो बिल्कुल तेरे जैसा हो भले मिलें न कभी पर साथ कुछ ऐसा हो मैं अगर कभी ख्वाबों में भी देख लूँ तुझको स्पन्दन मेरे शरीर में तुझको छूने जैसा हो।
दिल की ड्योढ़ी पर तूने जो रखे थे कदम उस दिन करूँ अभिनंदन उन पलों का उन्हें आँखों से चूमता हूँ, उस पहली मुलाकात को मैं समझ मील का पत्थर मानकर देव उस पत्थर को मैं तब से रोज़ पूजता हूँ।
जो न कह पाया तुझे वो पूरी दुनिया को सुनाता हूँ मैं जब बहकता हूँ तो बस तुझ पर गीत लिखता हूँ पीर दिल की है जो अब दिल में रखना मुश्किल है बाँटने को दुख मैं महफिलों में शेरों शायरी करता हूँ।
मिल कर भी तुमसे क्यूँ बिछड़ना सा प्रतीत हो दिल भारी जुबाँ खामोश दिन कैसे व्यतीत हो वाद्य यंत्र ये दिल और धड़कन मेरी संगीत हो मैं गुनगुनाता रहूँ जिसे हाँ तुम वो प्रेम गीत हो।