उसके आँखों की चमक भी कुछ ऐसी होती थी……. हमसे मिलने पर!
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बारिश क्या कुछ याद नहीं दिलाती……..!
©️अनुनाद/आनन्द कनौजिया/२४.०९.२०२०

उसके आँखों की चमक भी कुछ ऐसी होती थी……. हमसे मिलने पर!
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बारिश क्या कुछ याद नहीं दिलाती……..!
©️अनुनाद/आनन्द कनौजिया/२४.०९.२०२०

आज बहुत दिनों बाद चाँद को यूँ आसमान में बालकनी से देखा। पूरा चाँद। चमकीला चाँद।अद्भुत। आकर्षक। बिल्कुल तुम्हारे चेहरे की तरह! लाखों-करोडों में एक। इस चाँद पर तो नज़र ही नहीं टिक रही……….! बिल्कुल वैसे ही जैसे तुम्हारे चेहरे पर मेरी नज़र नहीं टिकती। इतना ख़ूबसूररत और सुर्ख चेहरा कि हज़ार कोशिशों के बाद मैं तुम्हें नहीं देख पाया। फोकस ही नहीं कर पाया। कभी मैं शर्म से पानी -२ हो गया तो कभी तुम खिलखिला दिए। कभी कुछ शरारती ख्यालों ने आंखों को झुकने पर मजबूर कर दिया। तुम्हारे चेहरे और इस चाँद में यही समानता है कि मैं दोनों को ढंग से नहीं देख पाया। चाँद दूर रहता है तो स्पष्ट नहीं दिखता और तुम करीब होते हो तो खुद को संभालना मुश्किल। 😇
कोई मुझसे तुम्हारा चेहरा पूँछ ले तो मेरे लिए बताना मुश्किल। जब भी तुम्हारे चेहरे को याद करने की कोशिश की तो एक रोशनी सी आँखों में कौंध गयी और कुछ पल को अँधेरा सा छा गया। तुमको तो बस तुम्हारी तस्वीरों में ही देख पाया, सामने से देख पाना मेरे लिए मुमकिन नहीं। इसे सौभाग्य समझूँ कि तुम दिल के इतने करीब हो और दुर्भाग्य कि तुम्हारे सजीव चेहरे को देखना सम्भव नहीं। खैर……! जब भी सामने या ख्यालों में होते हो वो पल आनन्दित करने वाला होता है। एक खास एहसास, जिसे शब्दों में बयाँ नहीं कर सकता। अगर तुम मेरा हाथ पकड़ लो तो हो सकता है कि मेरे शरीर का स्पन्दन तुम्हें कुछ समझा सके!💞
खैर, आज की रात फिर तुम मेरे करीब हो। मेरे मन में हो। मेरा बालकनी में जाना और अचानक चाँद पर नज़र पड़ना, मुझे तेरी याद दिला गया और मेरा दिन सफल हो गया। तेरे साथ के एहसास से गुदगुदाते हुए आज की ये रात बहुत ही खूबसूरत होने वाली है! काश……. ये चाँद आज तुम्हारी नज़र में भी आ जाए और तुम्हें मेरी स्थिति का एहसास दिल जाए! इस तरह हम दोनों एक साथ एक ही मनःस्थिति में एक दूसरे को करीब महसूस करते हुए एक-दूजे के ख्यालों में खो जाए…… 💗
कुछ तो खास है आज की रात में! इस चाँद में! इतना सजीव एहसास कि जैसे तुम्हारे साथ ही हूँ……….. कुछ माँग ही लेता हूँ! हो सकता है कि इस खास रात में दिल की ख्वाहिश पूरी हो जाए…….. काश……💓💖!
~अनुनाद/आनन्द कनौजिया/०२.०९.२०२०

कोई ये कहे कि उसके अन्दर लालच नही है तो गलत कहता है। कभी-२ ये लालच बड़ा होता है और कभी छोटी-२ चीजों का लालच। बचपन से शुरू ये आदत जीवन भर साथ देती है, बस रूप बदलता रहता है। मेरी माने तो अगर लालच न रहे तो जीवन का कोई पर्याय नही है। साधु-सन्त, सन्यासी वगैरह भी ईश्वर को पाने के लालच में ही दुनिया की मोह-माया का त्याग करते हैं।
मेरे छोटे बेटे। डेढ़ साल के । खाने की कोई चीज लेकर बैठो तो खाएँगे बाद में, पहले बड़े वाले बेटे को धक्का मार-२ कर दूर करेंगें। पता नहीं ये प्रोग्राम कैसे डेवलप हो गया। इसकी कोडिंग कब हो गई हमसे। हम तो इतने होनहार न थे। खैर….. अभी तो इस हरकत पर प्यार आता है। इससे साबित होता है कि लालच सीखा नहीं जा सकता, ये इनबिल्ट होता है। बड़े बेटे में नही है इस तरह के लालच की अतिरेकता और न वो छोटे को देखकर सीख पाया।
मेरे जीवन में लालच का रूप अलग है। नई किताब का लालच, उसे सूँघने का लालच। एक अच्छे पेन का लालच। एक अच्छी और खूबसूरत संगत का लालच। वीडियो गेम का लालच। नए गैजेट का लालच। टेक्नोलॉजी का लालच। एकान्त में बैठने का लालच। कई और हैं…….. सब नही बता सकता! अब इन सभी लालच में कुछ खरीदे जा सकते हैं और कुछ आपकी किस्मत से पूरे होते हैं। मेरे पूरे भी हुए। लेकिन मजा तो तब हो जब आपका ये लालच आप खुद न पूरा करें , कोई और गिफ्ट कर दे। आहा…….! आपका लालच अगर आपको मुफ्त में मिल जाये तो इससे बड़ा सौभाग्य कोई नही, इस खुशी का कोई मोल नहीं और इस लालच को पूरा करने वाला ईश्वर से कम नहीं। मगर अफसोस …. इस जीवन में कुछ भी मुफ्त नही मिलता। आज या कल कीमत अदा करनी पड़ती है। करनी पड़े … हमें क्या… फिलहाल मौके पर जो खुशी मिलती है उसे क्यूँ छोड़ा जाए।
आज-कल एक नया लालच जुड़ गया है- मास्क और हैंड सैनिटाइजर का लालच। न जाने कितने रूप में उपलब्ध हैं ये। भाँति-२ के मास्क और तरह-२ के छोटे, कॉम्पैक्ट, पॉकेट साइज सैनिटाइजर की बोतलें गज़ब का आकर्षण पैदा करती हैं। अब आप किसी से मिलें। आपका मास्क सामने वाले से बेहतर हो तो गर्व होता है। आत्म विश्वास बढ़ जाता है। सामने वाले को बेचारे की नज़र से देखने का जो आनन्द मिलता है कि बस पूछिये मत। इस पर आप जेब से एक खूबसूरत डिज़ाइन की बोतल से सैनिटाइजर निकालकर लगा लें और अपने ही बढ़ते घमण्ड को कम करने के लिए एक जोक भी छोड़ दें तो सोने पे सुहागा। बन गया भोकाल। सामने वाला चारों खाने चित्त और आप विजयी😁। कुछ ही पल में एक मानसिक लड़ाई के विजेता और आपकी ताजपोशी। हा हा ……! गज़ब होता है इन्सान।
फिलहाल…..! ये मास्क और सैनिटाइजर हैं बेहद जरूरी पर खरीदने को दिल नहीं करता। एक दो बार ही खरीदें होंगें, वो भी दिल पर पत्थर रखकर। ये चीजें कोई गिफ्ट कर दे तो मजा ही आ जाए। इस समय ये वस्तुएँ लालच की पराकाष्ठा पर हैं। यदि मेरे अगल-बगल का कोई व्यक्ति ईश्वर बनने की ख्वाहिश रखता हो तो उसका स्वागत है। हम उसे ईश्वर का दर्जा देने को तैयार हैं……….😜।
~अनुनाद/आनन्द कनौजिया/२७.०६.२०२०
आपकी बातों में छुपी शैतानियाँ समझते हुए भी वो अनजान बनते हों…
जब समझाओ तो ज्यादा होशियार न बनो, ये कहकर बातों को टाल देते हों…
इससे ज्यादा कोई रिश्ता क्या मुकम्मल होगा, कि दोनों दिल एक ही मुकाम पर हैं…
तू बस उनके साथ सफ़र को जी, इससे ज्यादा की क्यों उम्मीद करते हो…