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जरूरी है !

दुनिया में आ गए हो तो आना अच्छा है मगर 

आने के बाद बिरादर यहाँ बने रहना जरूरी है।

पैरों पर खड़े हो गए तो बहुत अच्छा है लेकिन 

खड़े होने के बाद यहाँ लम्बा खड़ा रहना जरूरी है।

भूख लग जाए तो बेटा ये भूख कभी मिटने न देना 

मजा खाने का लेना है तो तुम्हारा भूखे रहना जरूरी है।

मत घबराओ इस आग से जो सीने में धधकती है 

विज्ञान कहता है कि जीवन के लिए गर्मी बहुत जरूरी है।

थोड़े अजीब हो तुम जो सुखों को देख कर डरते हो 

आनन्द जीवन का लेना हो तो दुखों का होना भी जरूरी है।

आनन्द परेशान रहते हो कुछ न कुछ पाने के लिए 

तरक्की के लिए तुम्हारे तुम्हें परेशान रहना जरूरी है।

ईश्वर अब जीवन के इस चरण में तुझसे और क्या माँगू 

जो मिला है उसे सम्भालने को तेरी कृपा का होना जरूरी है। 

दुनिया में आ गए हो आनन्द तो अनुनादित रहो खूब

आने के बाद यहाँ दिलों में सबके बने रहना जरूरी है।

©️®️जरूरी है/अनुनाद/आनंद/२४.१२.२०२४

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मंज़िल और रास्ते

ग़र चाहते हो आनन्द मंज़िल पर पहुँचना,
मंज़िल से ज़्यादा रास्तों का ध्यान रखना।

तड़पते रह गये अपन मंज़िल की चाह में,
देखा ही नहीं कि तेरा गाँव भी था राह में।

समय कहाँ रुका है तेरे लिये या मेरे लिये,
निहारते बीते दौर को हाथों में तस्वीर लिए।

मैं फ़क़त ख़्वाब बुनता रहा तुझे पाने को,
रातों में सोया नहीं सोये भाग जगाने को।

मैंने लिखना छोड़ दिया अब क्या फ़ायदा,
भरे घावों को फिर कुरेदने से क्या फ़ायदा।

मैंने नशे करके भी देख लिये ऐ दिलरुबा,
ये कदम लड़खड़ाए तो बस तेरे नाम पर ।

नाम आनन्द है इसलिए खुश तो रहना ही था,
मुझे तेरा नाम और ये ग़म दोनों छुपाना ही था।

मैंने लिखना छोड़ दिया अब क्या फ़ायदा,
भरे घावों को फिर कुरेदने से क्या फ़ायदा।

©️®️मंज़िल और रास्ते/अनुनाद/आनन्द/२७.०४.२४

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पहनावा

“व्यक्ति को कपड़े पहनने का अधिकार होना चाहिए…. न पहनने का नहीं !”

सच लिखूँ तो बिना कपड़ों के तो केवल पशु-पक्षी ही ख़ूबसूरत दिखते हैं।

मानव प्रजाति तो कपड़ों में ही झेली जा सकती है वरना इससे बेकार देखने लायक़ दूसरी कोई चीज नहीं। झेला जाना मैंने इसलिए लिखा कि खूबसूरत होने के लिए कपड़ों के साथ व्यवहार का उत्तम होना भी अनिवार्य है।

हाँ कुछ डिज़ाइनर लोग कपड़ों को कुछ आड़ा-तिरछा काट एवं सिल कर इसमें भिन्नता तो ला सकते हैं पर कपड़े पहनना तब भी अनिवार्य है। “डोरियों को कपड़ों की संज्ञा नहीं दी जा सकती।”

निवेदन- जीवन सरल बनायें। इसलिए जो सम्भाल सकें उसे ही पहनें। उसके बाद ही आप अपनी, समाज और राष्ट्र की प्रगति के विषय में सोचने का मौक़ा निकाल पाएँगे!

नोट:- उपरोक्त सभी विचारों का बन्द कमरों से कोई वास्ता नहीं है। अपनी निजता के पलों में आप स्वयं ईश्वर हैं।

“Keep your privacy private.”

प्रणाम🙏

©️®️पहनावा/अनुनाद/आनन्द/०६.०१.२४

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मुस्कुरा दीजिए

यूँ भी क्यूँ इतना शर्म कीजिए,
इस ओर भी इक नज़र कीजिए …

परेशानी अपनी कुछ यूँ कम कीजिए,
कोई काम हो तो हमारा नाम लीजिए …

दिलों के सौदागर से एक सौदा कीजिए,
दिल की एक कहानी हमारे सुपुर्द कीजिए …

शोख़ इस चेहरे से क़िस्से हज़ार कीजिए,
बस इन क़िस्सों में नाम हमारा कीजिए …

स्याही ये लिखने की न यूँ जाया कीजिए,
सूखने से पहले कोई तो इशारा कीजिए …

मौक़ा निकाल कर लखनऊ घूम लीजिए,
कई पार्क हैं किसी में हमसे मिल लीजिए …

नवाबों के शहर में हैं बस इतना कीजिए,
देख कर हमारी ओर बस मुस्कुरा दीजिए …

©️®️मुस्कुरा दीजिए/अनुनाद/आनन्द/१७.१२.२०२३

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बिछड़ गए !

भटकना नसीब में था

इसीलिए

तुमसे बिछड़ गए…..!

 

आवारगी फ़ितरत न थी

मगर

घर से निकल पड़े।

 

एक शहर से दूसरे घूमे बहुत

मगर

कहीं ठहरना न हुवा….!

 

लोग बहुत जानते है यहाँ हमें

मगर

कोई अपना नहीं….!

 

ठहरना चाहा बहुत हमने

मगर

कहीं तुम मिले ही नहीं….!

 

रास्तों से दोस्ती कर ली

और

आशियाँ कोई बनाया नहीं….!

 

भटकना नसीब में था

इसीलिए

फिर दिल कहीं लगा ही नही…..!

©️®️बिछड़ गए/अनुनाद/आनन्द/२१.०७.२०२३