उजड़ा हूँ,
मग़र खत्म नही,
वक़्त की आँधी में
रूप मैंने खोया नही।
कहानी मेरी लिखेगा,
इतिहास बड़े गर्व से,
अवशेष मेरे बोलेंगे कि,
ये रूप पाया मैंने संघर्ष से।

उजड़ा हूँ,
मग़र खत्म नही,
वक़्त की आँधी में
रूप मैंने खोया नही।
कहानी मेरी लिखेगा,
इतिहास बड़े गर्व से,
अवशेष मेरे बोलेंगे कि,
ये रूप पाया मैंने संघर्ष से।
