डबडबायी आंखों को लेकर
मैं कैसे कुछ बोल दूँ?
देखो! तुम सामने न आना,
कहीं मैं फूट कर रो न दूँ…..
परेशान बहुत हूँ,
कुछ भी समझ नही आ रहा…..
ये समय क्यूँ आया?
जो तुझसे दूर ले जा रहा…..
जो दिखती नहीं तेरे मेरे दरमियाँ,
वो डोर बेहद मजबूत है…..
स्पर्श करने को तुझे,
मेरी ये दो आँखे बहुत हैं…..
जो भी बीता संग तेरे,
वो लम्हे सब याद आएँगें…..
पाने की चाहतें तो नहीं,
पर तुझे देखना जरूर चाहेंगे…..

बहुत ही प्यारी। विरह की वेदना स्पष्ट दिख रही है।
शुक्रिया 🙏
This comment means a lot to me.
🙏