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सबक! बेवजह…

तारीख़ मुक़र्रर कर दो सजा की मेरी,
अब मुझसे और इंतज़ार नही होता।

अब तो दम घुटता है मेरा मेरी बेगुनाही से,
गुनाह करता तो शायद इतना न परेशान होता।

दरिया क्या ही गहरा होगा, कोई तो छोर होगा!
ये शब्दों के मतलबों का अब किनारा नही मिलता।

देखो समय है अभी संभल जाओ ऐ लाल कलम वालों,
इक समझदार का बेवक़ूफ साबित होना, अच्छा नहीं होता।

वक़्त है ये ,आज तुम्हारा है तो कल मेरा भी आएगा,
पैसा, ताक़त, ग़ुरूर और समय किसी का सगा नही होता।

Author:

Writer, cook, blogger, and photographer...... yesssss okkkkkk I am an Engineer too :)👨‍🎓 M.tech in machine and drives. 🖥 I love machines, they run the world. Specialist in linear induction machine. Alumni of IIT BHU, Varanasi. I love Varanasi. Kashi nahi to main bhi nahi. Published two poetry book - Darpan and Hamsafar. 📚 Part of thre anthologies- Axile of thoughts, Aath dham assi and Endless shore. 📖 Pursuing MA Hindi (literature). ✍️ Living in lucknow. Native of Ayodhya. anunaadak.com, anandkanaujiya.blogspot.com

6 thoughts on “सबक! बेवजह…

  1. क्युं है अतीत में झांकता अपने वर्चस्व को ढूँढता हुआ

    जो तेरे आज में है तुझे बनाया
    जो तूने है अपने हाथों से सींचा
    कर कुछ अमल अपने आप से
    कर कुछ गुजर अपने आप से
    आने वाला कल जब देखे अतीत में
    पाए तुझे सफल पाए तुझे सफल

  2. Wah Anand bhai kya baat hai
    पैसा, ताक़त, ग़ुरूर और समय किसी का सगा नही होता
    Very true.

    1. There is no problem which I cannot conquer.I am strong in mind ; body and spirit.My will; My strength,and my determination are always greater than any problems and I face.

  3. When I meet a new problem, I do not see the problem as my enemy. I know that finding the solution to the problem will move the forward in my own personal growth.

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