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जीवन उत्सव

तुम क्या समझो यह जीवन उत्सव,
पल भर फुरसत में अपनों के साथ तो बैठो!
मंद-तीव्र भावों में चिंता नहीं अवसाद नहीं
सूखे इन चेहरों पर खिलती मुस्कान तो देखो।

पाना और संचय करना बेहद जरूरी,
मगर फकीरी अंदाज का आनन्द तो देखो!
व्यर्थ क्यों करता है तू चिंता कल की,
आओ आकर आनंद की चौपाल में बैठो।

©️®️अनुनाद/आनन्द कनौजिया/१५.०२.२०२१