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अधूरी इच्छा

तुम्हारे संग
इच्छा थी
सब कुछ
करने की !
मगर….
एक उम्र
बीतने के बाद
कोई मलाल नहीं है
कुछ न कर पाने की
तुम्हारे संग ।

और अब देखो
नहीं चाहते हम
कि हमारी
कोई भी इच्छा
जिसमें तुम हो
वो पूरी हो !

इन अधूरी इच्छाओं
को पूरा
करने की कोशिश में
तुमको मैं अपने
कुछ ज़्यादा
क़रीब पाता
और महसूस
करता हूँ।

दिमाग़ में बस
तुम होते हो
और धड़कन
तेज होती हैं!
तुम्हारे पास
होने के एहसास
भर से मैं
स्पंदित
हो उठता हूँ
और मन
आनन्द के हिलोरों
पर तैरने लगता है!

इच्छाएँ पूरी
हो जाती तो
शायद
तुमसे इश्क़
इतना सजीव
न हो पाता!
इसलिए जब भी
इन इच्छाओं को
पूरा करने का मौक़ा
मिलता है तो
दिल दुवा करता है
कि तेरे संग की
मेरी हर इच्छा
सदा रहे
अधूरी इच्छा…..!

©️®️अधूरी इच्छा/अनुनाद/आनन्द/१६.०९.२०२२

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दिन कहाँ अपने

आज के दौर में
दिन कहाँ अपने
अपनी तो बस
अब रात होती है।

बस व्यस्त काम में
खोए हैं सारे जज़्बात
इस सब में दिल की
कहाँ बात होती है।

कभी गलती से ख़ाली
जो मिल जाएँ कुछ पल
इन ख़ाली पलों में भी बस
काम की बात होती है।

आगे बढ़ने की दौड़ में
ठहरना भूल गए हम
मिलना-जुलना खाना-पीना
अब कहाँ ऐसी शाम होती है।

कुछ रिश्ते थे अपने
कुछ दोस्त सुकून के
घण्टों ख़ाली संग बैठने को अब
ऐसी बेकार कहाँ बात होती है।

आज के दौर में
दिन कहाँ अपने
अपनी तो बस
अब रात होती है।

©️®️दिन कहाँ अपने/अनुनाद/आनन्द/१२.०८.२०२२

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पैसा

लोग कहते हैं
कि
पैसा चलता है…
मगर
सच तो ये है
कि
लोग चलते हैं…
पैसा लेकर !

पैसा लेकर
मस्तिष्क में,
चेहरे पर,
व्यवहार में,
और
अन्त में
जेब में।

©️®️पैसा/अनुनाद/आनन्द/०३.०७.२०२२

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जादू-टोना

कौन कहता है ये जादू-टोने नहीं होते
ग़ज़ब अजूबों के अजब तजुर्बे नहीं होते
सब कुछ सीखा यहाँ हमने हंसते-रोते
और फिर देखो ये जादू नहीं तो और क्या
एक चेहरे को देखा और सब कुछ हम भूल गए……

बचपन से थे अच्छे से पढ़ते-लिखते
लोग बाग़ तारीफ़ करते नहीं थकते
सारे समीकरण ज़ुबान पर थे बने रहते
चेहरे पर उनकी ज़ुल्फ़ों से जो लिखी इबारतें
इक बार जो पढ़ी तो सारे किताबी समीकरण भूल गए…..

गुणा-गणित में हम मिनट नहीं लगाते
जोड़-घटाने में हम सबको पीछे रखते
चलता-फिरता बही-खाता सबका हिसाब रखते
होठों की हल्की मुस्कान और उनके पीछे चमकीले दाँत
और फिर उनकी चकाचौंध में हम सारी दुनियादारी भूल गए…..

बेहतरीन चीजों का हम शौक़ थे रखते
पसंद की चीजों को संजोकर थे रखते
अपनी हर चीज को दिल से लगा कर रखते
बस उनके जीवन में आ भर जाने से देखो
एक उनको अपनाकर हम सब कुछ अपना भूल गए….

कौन कहता है ये जादू-टोने नहीं होते
ग़ज़ब अजूबों के अजब तजुर्बे नहीं होते
सब कुछ सीखा यहाँ हमने हंसते-रोते
और फिर देखो ये जादू नहीं तो और क्या
एक चेहरे को देखा और सब कुछ हम भूल गए……

©️®️जादू/अनुनाद/आनन्द/२२.०६.२०२२

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रात और बात

और क्या चाहिए तुमसे करने को बात ,
दिल में तेरी याद और एक तनहा रात ।

हवा भी सरसराए तो मुझमें खिल उठते जज़्बात,
बग़ल तेरे होने के एहसास से मुकम्मल होती रात ।

इक भीड़ सी है मुझमें जो न रहने दे मुझे शान्त ,
यादों के कारवाँ संग मैं बेहद अकेला इस रात ।

ज़िन्दगी के सफ़र में तुम कहीं मैं कहीं, न होती बात,
सिर्फ़ यादों को साथ लेकर बोलो कैसे बीते रात ।

और क्या चाहिए तुमसे करने को बात ,
दिल में तेरी याद और एक तनहा रात ।

©️®️रात/अनुनाद/आनन्द/११.०६.२०२२