हाथों की लकीरों में,
लिखा सब कुछ है।
जी लो खुलकर कि सब कुछ पहले से तय है,
लिखे को बदलने की कोशिश कर, परेशान क्यूं होना हैं।
न कर शिकायत कि मदद को कोई नही है,
ये तेरी जिंदगी है तुझे खुद ही लड़ना है।
खुदा की मर्जी है हर घटना में,
तुझे सबसे खुद निपटना है।
ले अल्लाह का नाम और भर हिम्मत कि,
कश्ती तूफानों से पार तुझे खुद करना है।
Month: May 2019
तू अगर इज़ाज़त दे!
एक गुस्ताखी सरे आम कर दूँ,
भरी महफ़िल तेरा नाम ले लूँ।
सिफ़ारिश पर ये उँगली मैं तेरी ओर कर दूँ,
तेरे चेहरे के नूर से मैं शमा ये रोशन कर लूँ।
नाम के संग तेरे मैं अपना नाम जोड़ दूँ,
चाहने वालों से तेरे मैं पंगा मोल ले लूँ।
लोगों के ज़ुबान पर ये चर्चा आम कर दूँ,
तेरी मेरी यह कहानी मैं अपने नाम कर लूँ।
अब वो बात न थी!
बरसों बाद बात हुयी तो करने को कोई बात न थी,
न कोई सवाल न जवाब और न ही कोई शिकायत थी।
दो दिल थे बेहद नज़दीक थे लेकिन अब धड़कनों में वो कशिश न थी,
हाथों में हाथ होते थे जब साथ थे लेकिन अब साथ चलने की हिम्मत न थी।
जुदा थे दूर शहरों में रहते थे लेकिन शहरों में इतनी भी दूरियाँ न थी,
मिलने की कोशिशें कर सकते थे लेकिन अब पास आने की तड़प न थी।
मिले तो आँखो में पहली सी चमक थी लेकिन किरदारों में वो बात न थी।
फिर से बन सकती थी कहानी नयी लेकिन लिखने को क़लम में मेरे स्याही न थी।
